भारत में चीनी का इतिहास

आज हमारी रसोई और जिंदगी का एक जरूरी हिस्सा बन चुकी चीनी का सफर काफी दिलचस्प है। भारत में चीनी लाने का श्रेय मुख्य रूप से ऑस्ट्रोनेशियन व्यापारियों को जाता है। आज से लगभग 3,000 साल पहले, ये व्यापारी समुद्री रास्तों और व्यापार के जरिए चीनी को भारत और चीन लेकर आए थे।

शुरुआत में यह गन्ने के रूप में थी। जब यह पौधे भारत और चीन पहुंचे, तो यहाँ की स्थानीय किस्मों के साथ इनका मेल हुआ। यहाँ आने के बाद गन्ने की स्थानीय प्रजातियों जैसे सैकेरम सिनेंस और सैकेरम बारबेरी के साथ इसका संकरण (হাইব্রিडाइजेशन) किया गया। इस प्रक्रिया से गन्ने की और बेहतर किस्में विकसित हुईं, जिनसे आगे चलकर मीठी चीनी बनाने की कला को बढ़ावा मिला। इस तरह, सदियों पहले हुई इस व्यापारिक और कृषि से जुड़ी यात्रा ने हमारे भोजन में मिठास घोलने की शुरुआत की थी।

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