रूठी रानी उमादे: एक ऐतिहासिक पहचान
कई बार इतिहास के पन्नों में छुपी कहानियाँ समय के साथ धुंधली पड़ जाती हैं, लेकिन कुछ नाम अपनी वीरता और त्याग के कारण हमेशा याद रखे जाते हैं। ऐसी ही एक व्यक्ति हैं रूठी रानी उमादे, जिनके नाम की चर्चा आज भी राजस्थान के इतिहास में की जाती है।
उमादे जैसलमेर के रावल लूणकरण की पुत्री थीं और विवाह के बाद जोधपुर के राजा राव मालदेव की रानी बनीं। लेकिन समय के साथ उनके और राजा के बीच अनबन हो गई, जिसके बाद वह रूठकर अजमेर के तारागढ़ किले चली गईं। यहाँ उन्होंने अपना जीवन बिताया और अंततः यहीं उनकी मृत्यु हुई।
आज भी तारागढ़ किले में रानी उमादे की छत्रछाया (समाधि) मौजूद है, जो उनकी यादगार के रूप में खड़ी है। यह स्थान न केवल ऐतिहासिक महत्व रखता है, बल्कि स्थानीय लोगों के बीच उनकी वीरता और स्वाभिमान की मिसाल के रूप में भी जाना जाता है।
रूठी रानी का नाम सिर्फ एक प्रेम कथा नहीं, बल्कि एक ऐ
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