मज़दूर दिवस: श्रमिकों के समर्पण और अधिकारों का प्रतीक

दुनियाभर में हर साल 1 मई का दिन अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस (International Labour Day) या 'मई दिवस' (May Day) के रूप में मनाया जाता है। इसे अंग्रेज़ी में मुख्य रूप से Labour Day कहा जाता है। यह दिन समाज और देश के निर्माण में अपना अमूल्य योगदान देने वाले मेहनतकश मज़दूरों के संघर्ष, समर्पण और मेहनत को सम्मान देने का एक विशेष अवसर है।

इस दिवस की शुरुआत 19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में अमेरिका में हुए मज़दूर आंदोलनों से हुई थी। उस समय श्रमिकों से 12 से 15 घंटे तक काम कराया जाता था। इसके विरोध में मज़दूरों ने एकजुट होकर काम के घंटे 8 घंटे तय करने की माँग उठाई। इस ऐतिहासिक संघर्ष की याद में और श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा के उद्देश्य से 1 मई को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दी गई। भारत में पहला मज़दूर दिवस 1 मई 1923 को चेन्नई में मनाया गया था।

आज के दौर में मज़दूर दिवस केवल एक अवकाश का दिन नहीं है, बल्कि यह हमें याद दिलाता है कि किसी भी राष्ट्र की प्रगति की नींव उसके श्रमिकों के पसीने और मेहनत पर टिकी होती है। चाहे निर्माण कार्य हो, कारखाने हों या अन्य सेवा क्षेत्र, हर जगह श्रमिकों का योगदान अतुलनीय है। इस दिन विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से श्रमिकों के कल्याण, उचित वेतन और उनके अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाई जाती है।

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