मुसलमानों के लिए कुरान का महत्व और आस्था

इस्लाम धर्म में कुरान को केवल एक पवित्र किताब ही नहीं, बल्कि अल्लाह (ईश्वर) का प्रत्यक्ष कलाम यानी वाणी माना जाता है। मुसलमान इसे अपने जीवन का सबसे अंतिम, सच्चा और संपूर्ण मार्गदर्शन मानते हैं। हर मुसलमान का यह दृढ़ विश्वास है कि कुरान के शब्द सीधे अल्लाह की तरफ से पैगंबर मोहम्मद पर नाज़िल (प्रकट) हुए थे।

मुसलमान कुरान के प्रति गहरा सम्मान व्यक्त करते हैं। इसे पढ़ने से पहले वज़ू (हाथ-पैर और मुंह धोकर खुद को पवित्र करना) किया जाता है। घर में भी इसे किसी साफ और ऊंचे स्थान पर रखा जाता है। लेकिन इसका सम्मान सिर्फ अलमारी में सजाकर रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे रोज़ाना पढ़ना और इसके अर्थ को समझना हर मुसलमान के लिए बहुत ज़रूरी माना गया है।

कुरान इंसान को जीवन जीने का सही तरीका सिखाता है। इसमें सच्चाई, न्याय, दया, माता-पिता की सेवा और दूसरों की मदद करने जैसे नैतिक मूल्यों पर बहुत जोर दिया गया है। इबादत (प्रार्थना) के तरीके से लेकर आपस के रिश्तों और व्यापार तक, जीवन के हर पहलू में कुरान मार्गदर्शन करता है।

इसके अलावा, दुनिया भर में लाखों मुसलमान कुरान को पूरा ज़बानी याद करते हैं, जिन्हें हाफ़िज़ कहा जाता है। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है, जिससे कुरान अपने मूल रूप में सुरक्षित है। संक्षेप में कहें तो, कुरान एक मुसलमान के लिए उसके ईमान की बुनियाद और जिंदगी का मार्गदर्शक है।

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