इस्लाम में शराब पीने की मनाही क्यों है?

इस्लाम धर्म में शराब और किसी भी तरह के नशीले पदार्थों का सेवन पूरी तरह से वर्जित यानी हराम माना गया है। इस संबंध में मुख्य निर्देश पवित्र कुरान में मिलते हैं, जो मुसलमानों के लिए जीवन का मार्गदर्शन करते हैं।

कुरान के अनुसार, शराब इंसान की बुद्धि और विवेक को भ्रमित कर देती है, जिससे व्यक्ति सही और गलत की पहचान करने की क्षमता खो बैठता है। जब होश ठीक नहीं रहता, तो इंसान से ऐसे काम हो जाते हैं जो आम हालात में वह कभी न करे।

इसके अलावा, इसके पीछे बहुत मजबूत सामाजिक और पारिवारिक कारण भी हैं। शराब पीने से अक्सर परिवारों में कलह बढ़ती है, आपसी रिश्ते टूटते हैं और समाज में नफरत या हिंसा फैलती है। इस्लाम एक ऐसा समाज चाहता है जहाँ लोग साफ-सुथरे दिमाग के साथ रहें, अपने परिवार की जिम्मेदारी उठाएं और एक-दूसरे के साथ भाईचारे से पेश आएं। यही वजह है कि ऐसे किसी भी नशे से दूर रहने की सख्त हिदायत दी गई है जो इंसान और समाज दोनों को नुकसान पहुँचाए।

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