रतन टाटा का पैतृक गाँव और टाटानगर की कहानी
भारत के सबसे सम्मानित उद्योगपतियों में से एक, रतन टाटा का नाम आते ही हर भारतीय का सिर गर्व से झुक जाता है। जब लोग उनके इतिहास और जड़ों के बारे में जानना चाहते हैं, तो अक्सर सवाल उठता है कि रतन टाटा का मूल गाँव कौन सा है और उनके परिवार की शुरुआत कहाँ से हुई।
वैसे तो टाटा परिवार का संबंध गुजरात के नवसारी शहर से रहा है, जहाँ रतन टाटा के पूर्वजों का जन्म हुआ था। लेकिन अगर बात करें उनके परिवार की कर्मभूमि की, तो पूरे देश में झारखंड के जमशेदपुर को असली 'टाटानगर' कहा जाता है। बहुत कम लोग जानते हैं कि इस पूरे शहर की नींव रतन टाटा की पुरानी पीढ़ियों, विशेषकर उनके परदादा जमशेदजी टाटा के दूरदर्शी सपनों की वजह से रखी गई थी।
1900 के दशक की शुरुआत में जहाँ केवल जंगल और छोटे-छोटे गाँव हुआ करते थे, वहाँ टाटा परिवार की दूरदर्शिता ने भारत के पहले योजनाबद्ध औद्योगिक शहर को जन्म दिया। बाद में भारत सरकार ने टाटा समूह के इस महान योगदान के सम्मान में यहाँ के रेलवे स्टेशन और इस क्षेत्र को टाटानगर नाम दिया। यही वजह है कि आज रतन टाटा किसी एक गाँव या शहर तक सीमित नहीं हैं; पूरा टाटानगर और उनका यह महान इतिहास हर भारतीय के दिल में बसता है।
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