रतन टाटा और उनका ड्रीम प्रोजेक्ट: टाटा नैनो

भारत के महान उद्योगपति रतन टाटा का सपना था कि देश के हर आम परिवार के पास अपनी एक कार हो। बारिश में मोटरसाइकिल पर पूरे परिवार को सफर करते देख उन्होंने एक बेहद सस्ती और सुरक्षित कार बनाने का संकल्प लिया। इसी सोच के साथ जनवरी 2008 में टाटा मोटर्स ने टाटा नैनो को दुनिया के सामने पेश किया।

इसे भारत की सबसे सस्ती यानी 'लखटकिया कार' के नाम से जाना गया। जब नैनो बाजार में आई, तो इसने पूरी दुनिया का ध्यान भारत की ओर खींचा। रतन टाटा ने खुद कई मौकों पर इस कार का इस्तेमाल किया, क्योंकि यह उनके दिल के बेहद करीब थी और उनके दूरदर्शी दृष्टिकोण का प्रतीक थी।

हालांकि, बेहतरीन तकनीक और कम कीमत के बावजूद टाटा नैनो को 'सस्ती कार' के रूप में प्रचारित करना इसकी सबसे बड़ी नाकामी बना। भारतीय बाजार में कार को सिर्फ जरूरत नहीं, बल्कि स्टेटस सिंबल माना जाता है। इस वजह से नैनो की बिक्री में भारी गिरावट आई और यह ड्रीम प्रोजेक्ट उम्मीदों पर खरा नहीं उतर सका। आखिरकार इसका उत्पादन बंद करना पड़ा, लेकिन रतन टाटा का यह प्रयास आज भी भारतीय ऑटोमोबाइल इतिहास में एक साहसिक और ऐतिहासिक कदम माना जाता है।

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