रानी रूपमती और बाज बहादुर की अमर प्रेम कहानी
मालवा के इतिहास में रानी रूपमती और बाज बहादुर का प्रेम एक मिसाल माना जाता है। संगीत और कला से जुड़ा यह अनोखा रिश्ता जितना खूबसूरत था, इसका अंत उतना ही दर्दनाक रहा। जब मुगल सेना ने मालवा पर आक्रमण किया और बाज बहादुर युद्ध में पराजित होकर बंदी बना लिए गए, तो रानी रूपमती का हृदय इस वियोग को सहन न कर सका।
अपने स्वाभिमान की रक्षा करने और प्रेमी के बंदी बनने के दुख से पीड़ित होकर रानी रूपमती ने आत्महत्या कर ली। जब रानी के इस बलिदान की खबर सम्राट अकबर तक पहुंची, तो उनका दिल बेहद दुखी हो गया। इस अमर प्रेम से प्रभावित होकर अकबर ने फौरन बंदी बनाए गए प्रेमी बाज बहादुर को मुक्त कर दिया।
रिहा होने के बाद बाज बहादुर अपनी प्रेमिका की समाधि पर पहुंचे और वहीं तड़प-तड़पकर अपने प्राण त्याग दिए। अकबर ने इस सच्चे प्रेम का सम्मान करते हुए खुद उस स्थान पर बाज बहादुर का मकबरा बनवाया। सारंगपुर में मौजूद यह समाधि आज भी उनकी पवित्र प्रेम कहानी की याद दिलाती है।
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