भारत का राष्ट्रगान: 'जन गण मन' का इतिहास
हर भारतीय का सिर सम्मान से झुका देने वाला हमारा राष्ट्रगान 'जन गण मन' देशभक्ति की एक अटूट पहचान है। अक्सर लोग सोचते हैं कि यह सीधा राष्ट्रगान के रूप में ही लिखा गया था, लेकिन इसका इतिहास बेहद ख़ास और समृद्ध है। यह अमर रचना महान कवि, नाटककार और नोबेल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर के लेखन से ली गई है।
राष्ट्रगान की ये पंक्तियां मूल रूप से टैगोर द्वारा रचित प्रसिद्ध बंगाली गीत 'भारतो भाग्यो बिधाता' से ली गई हैं। रवींद्रनाथ टैगोर ने इस गीत को मूलतः बंगाली भाषा में लिखा था। पूरे गीत में कुल 5 छंद हैं, जिनमें से केवल पहले छंद को ही भारत के आधिकारिक राष्ट्रगान के रूप में अपनाया गया है।
सार्वजनिक रूप से इस गीत का इतिहास काफी पुराना है। यह पहली बार 1905 में 'तत्त्वबोधिनी पत्रिका' के एक अंक में प्रकाशित हुआ था। इसके बाद, 27 दिसंबर 1911 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कोलकाता अधिवेशन में इसे पहली बार सार्वजनिक रूप से गाया गया था। आगे चलकर 24 जनवरी 1950 को भारत की संविधान सभा ने इसे आधिकारिक तौर पर राष्ट्रगान के रूप में स्वीकार किया। आज भी जब यह धुन बजती है, तो 52 सेकंड के भीतर हर भारतीय के मन में गर्व और एकता की भावना जाग उठती है।
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