ज्वालामुखी के नीचे मैग्मा कक्ष कहाँ छिपे हैं?

अगर आपने कभी सोचा है कि ज्वालामुखी विस्फोट के पीछे छिपा मैग्मा कहाँ रहता है, तो वैज्ञानिकों ने इसका जवाब खोज लिया है। एक नए अध्ययन के अनुसार, विस्फोटक ज्वालामुखियों के मैग्मा कक्ष आमतौर पर पृथ्वी की सतह से छह से 10 किलोमीटर की गहराई पर ही क्यों पाए जाते हैं, यह अब समझ में आ गया है।

यह गहराई कोई संयोग नहीं है। वैज्ञानिकों के अनुसार, यहाँ के दबाव और तापमान की स्थिति मैग्मा को ठीक इतना तरल रखती है कि वह इकट्ठा हो सके, लेकिन फिर भी ऊपर की ओर धीमे-धीमे धकेला जा सके। इसे ही कुछ वैज्ञानिक "मीठी जगह" (sweet spot) कहते हैं।

कंप्यूटर मॉडल्स से पता चला है कि इस गहराई से कम या अधिक होने पर मैग्मा या तो ठंडा हो जाता है या फिर बहुत तेजी से ऊपर आता है, जिससे स्थिर भंडारण नहीं हो पाता। इसीलिए लगातार विस्फोट करने वाले ज्वालामुखी, जैसे इटली का विसुवियस या इंडोनेशिया का क्राकाटोआ, अक्सर इसी गहराई तक सीम

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