हथौड़ी की मांग
एक दिन, लेखक के मित्र ने अचानक हथौड़ी मांगी। वह बाइक की ओर इशारा करते हुए बोला, “इसे देखो, यह बहुत खराब हालत में है!” उसने बाइक के सामने वाले पहिए को ध्यान से देखा था। वह लड़का समझ गया था कि शायद यह टूटी हुई साइकिल किसी तकनीशियन के हाथ का काम लगती है।
“क्या यह ठीक करने लायक है?” लेखक ने पूछा। लेकिन उसका मित्र तो पहले ही काम में जुट गया था। वह जमीन पर बैठ चुका था, सामने का पहिया उसके पैरों के बीच था। उसने हथौड़ी की मांग की, शायद कुछ खोलने या ठीक करने के लिए।
लेखक हैरान था। उसे नहीं लगता था कि उसका दोस्त इतना कुछ जानता होगा। लेकिन वह आदमी बिलकुल तकनीशियन जैसा दिख रहा था—गंभीर चेहरा, गहन ध्यान, और हर छोटी चीज़ पर नज़र।
यह दृश्य पढ़कर ऐसा लगता है मानो कोई कलाकार अपनी कला में डूबा हो। बाइक की खराबी देखकर लड़के को लगा कि शायद यहाँ कुछ गड़बड़ है, और वह बिना किसी की मदद के ही इसे ठीक करना चाहता था।
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