विवाह से पहले की रस्में: महिलाओं की परंपरागत तैयारियाँ

शादी से चार-पांच दिन पहले महिलाएं घर में खास तैयारियाँ शुरू कर देती हैं। ये दिन सिर्फ रस्मों का नहीं, बल्कि प्यार, उत्साह और सामूहिक आनंद का भी होता है। इस दौरान महिलाएं मिलकर पारंपरिक गीत गाती हैं, जिन्हें स्थानीय भाषा में "सहगी" या "महिया" भी कहा जाता है।

कई इलाकों में ये गीत रात भर चलते हैं। दुल्हन की माँ, बहनें, चाची-मौसी और पड़ोसिनें सब एक साथ बैठकर गाने के साथ-साथ घर के काम, रस्मों के बारे में बातचीत भी करती हैं। ये पल न सिर्फ उत्सव के होते हैं, बल्कि आपसी रिश्तों को मजबूत करने वाले भी होते हैं।

इन दिनों महिलाएं हल्दी, मेहंदी और अन्य सजावटी तैयारियों में भी लगी रहती हैं। दुल्हन के कपड़े सजाए जाते हैं, मंगल सूत्र और आभूषण तैयार किए जाते हैं। कई जगहों पर बुजुर्ग महिलाएं युवा लड़कियों को शादी के बाद की जिम्मेदारियों और पति के साथ व्यवहार के बारे में सलाह भी

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