विवाह में देरी के कारण: ज्योतिष दृष्टिकोण
कई बार जीवन में सब कुछ तय होने के बावजूद विवाह में देरी हो जाती है। ऐसे में लोग आश्चर्य करते हैं कि आखिर क्यों यह हो रहा है। ज्योतिष के अनुसार, इसके पीछे ग्रहों की स्थिति का बहुत प्रभाव होता है।
सूर्य, मंगल या बुध जब लग्न या लग्नेश पर दृष्टि डालते हैं, तो व्यक्ति के विवाह में देरी हो सकती है। ऐसा इसलिए क्योंकि इन ग्रहों के प्रभाव से व्यक्ति का ध्यान आध्यात्मिकता या आत्म-खोज की ओर अधिक बढ़ जाता है। इसके साथ ही, अगर गुरु बारहवें भाव में स्थित हो, तो यह भी विवाह में देरी का कारण बन सकता है।
विवाह के लिए प्रमुख भाव हैं – प्रथम (लग्न), सप्तम (विवाह भाव) और बारहवाँ (आध्यात्मिकता व विदेश यात्रा)। अगर इन भावों में गुरु या कोई शुभ ग्रह योग न बना हो, तो विवाह में बाधाएँ आ सकती हैं। इसके अलावा, चंद्रमा कमजोर होने पर भावनात्मक अस्थिरता आती है, जिससे संबंधों में देरी या रुकावट हो सकती है।
हाल
टिप्पणियाँ
अभी तक कोई टिप्पणी नहीं। सबसे पहले प्रतिक्रिया दें।