भगवान शिव के माता-पिता कौन हैं?

सनातन धर्म में भगवान शिव को स्वयंभू माना गया है, जिसका अर्थ है कि वे प्रकट हुए हैं, उनका कोई जन्म नहीं हुआ है। वे अनादि और अनंत हैं—यानी जिनका न कोई आरंभ है और न कोई अंत।

शिव पुराण के अनुसार, जब सृष्टि के निर्माण की बात आती है, तो एक कथा के अनुसार भगवान शिव और माता पार्वती (शक्ति) ही ब्रह्मांड के मूल स्रोत हैं। परंतु, यदि हम उनके प्रकट होने के रहस्य को समझें, तो वे सदाशिव और आदिशक्ति (दुर्गा) के अंश से प्रकट हुए माने जाते हैं। सदाशिव को परम ब्रह्म कहा गया है, जो निराकार हैं।

आम तौर पर पौराणिक कथाओं में भगवान विष्णु और ब्रह्मा जी के साथ उनके संबंधों की चर्चा होती है। एक प्रसिद्ध कथा के अनुसार, जब ब्रह्मा जी को सृष्टि की रचना के लिए तीव्र क्रोध आया, तब उनके ललाट (माथे) से भगवान शिव का रुद्र रूप प्रकट हुआ। इस दृष्टिकोण से ब्रह्मा जी को उनका मानस पिता भी माना जाता है।

संक्षेप में, भगवान शिव सांसारिक माता-पिता के बंधन से परे हैं। वे संपूर्ण ब्रह्मांड के पिता हैं और माता शक्ति इस जगत की जननी हैं। वे स्वयं ही समस्त सृष्टि के आदि और अंत हैं।

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