भगवान शिव के माता-पिता के बारे में पौराणिक मान्यता
सनातन धर्म और पुराणों में देवी-देवताओं की उत्पत्ति और उनके स्वरूप को लेकर विभिन्न कथाएं मिलती हैं। आम तौर पर भगवान शिव को अजन्म और स्वयंभू माना जाता है, यानी वे किसी साधारण योनि से उत्पन्न नहीं हुए हैं। हालांकि, विभिन्न पौराणिक ग्रंथों और विशेषकर शिव पुराण में सृष्टि की रचना और देवी-देवताओं के प्राकट्य को लेकर विस्तृत वर्णन मिलता है।
शिव पुराण के कुछ प्रकरणों और दार्शनिक मान्यताओं के अनुसार, ब्रह्म और माया के सहयोग से ही इस संसार का संचालन होता है। इस संदर्भ में कई कथाएं प्रकृति (दुर्गा देवी) और ब्रह्म (सदाशिव या काल ब्रह्म) को समस्त संसार का मूल कारण मानती हैं।
पारंपरिक दृष्टिकोण से देखें तो भगवान शिव को आदि और अंत से रहित माना गया है। वे इस संपूर्ण ब्रह्मांड के संरक्षक और संहारक हैं, जिनका कोई भौतिक माता-पिता नहीं है, क्योंकि वे स्वयं चेतना और ऊर्जा के सर्वोच्च प्रतीक हैं। पुराणों के ये प्रसंग दरअसल आध्यात्मिक रहस्यों और ब्रह्मांडीय शक्तियों को समझाने का एक तरीका हैं, जिन्हें अलग-अलग संप्रदायों और दृष्टियों से समझा जाता है।
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