शीतला माता का भोजन: परंपरा और श्रद्धा का संगम

शीतला सप्तमी, रंगपंचमी के बाद आने वाला एक पवित्र पर्व है, जब माँ शीतला की विशेष पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस दिन माँ बच्चों को चेचक जैसी बीमारियों से बचाती हैं। इसी के चलते लोग श्रद्धा के साथ उनका भोग लगाते हैं।

भोग के रूप में क्या चढ़ाया जाता है?

शीतला माता को प्रसन्न करने के लिए लोग एक दिन पहले ही भोजन बना लेते हैं। अगले दिन, जो खाना बन चुका होता है, उसे ठंडा करके माँ को अर्पित किया जाता है। प्रमुख रूप से दही, चावल, पूरी, हलवा और कुछ स्थानों पर मांस भी भोग के रूप में चढ़ाया जाता है। यह ठंडा खाना, जिसे 'बसौड़ा' कहा जाता है, माँ के नाम का होने के कारण उसे फिर से नहीं गरम किया जाता।

परंपरा में छुपा है विज्ञान

इस बात का भी ध्यान रखा जाता है कि इस दिन घर में नया खाना नहीं बनाया जाए — एक पारंपरिक नियम, जो संभवतः स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता भी दर्शाता है। माँ शीतला की कृपा बरसाने की म

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