शुद्ध भोजन और उसका महत्व

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में सेहतमंद रहना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। ऐसे में शुद्ध भोजन या सात्विक आहार हमारे शरीर और मन दोनों के लिए वरदान साबित होता है। यह ऐसा आहार है जो पूरी तरह से प्राकृतिक, फाइबर से भरपूर और कम वसा वाला होता है।

पारंपरिक भारतीय जीवनशैली में भोजन को तीन श्रेणियों में बांटा गया है—सात्विक, राजसिक और तामसिक। शुद्ध यानी सात्विक भोजन खाने से शरीर को सही पोषण मिलता है और मन में शांति, शीतलता, खुशी तथा मानसिक स्पष्टता बनी रहती है। इसके विपरीत, बहुत अधिक मसालेदार या उत्तेजित करने वाला भोजन राजसिक कहलाता है, जबकि सुस्ती और कमजोरी पैदा करने वाला भोजन तामसिक माना जाता है।

अपने दैनिक जीवन में ताजे फल, हरी सब्जियां, साबुत अनाज और सात्विक आहार को अपनाकर हम न सिर्फ शारीरिक बीमारियों से दूर रह सकते हैं, बल्कि अपनी मानसिक ऊर्जा और एकाग्रता को भी काफी हद तक बढ़ा सकते हैं। स्वस्थ जीवन की शुरुआत शुद्ध और संतुलित खान-पान से ही होती है।

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