जमशेदजी टाटा का परिवार और उनके उत्तराधिकारी
भारतीय उद्योग जगत के संस्थापक जमशेदजी टाटा और उनकी पत्नी हीराबाई दब्बू को कुल चार संतानों की प्राप्ति हुई थी, जिनमें दो पुत्र और दो पुत्रियां शामिल थीं। उनके दोनों बेटों के नाम सर दोराबजी टाटा और रतनजी टाटा थे। इन दोनों भाइयों ने अपने पिता के विज़न को आगे बढ़ाते हुए टाटा समूह को वैश्विक पहचान दिलाने में मुख्य भूमिका निभाई।
बड़े पुत्र दोराबजी टाटा ने जमशेदजी टाटा के सपनों को साकार करते हुए देश के पहले एकीकृत इस्पात संयंत्र 'टाटा स्टील' और 'टाटा पावर' की स्थापना में निर्णायक योगदान दिया। वहीं छोटे पुत्र रतनजी टाटा ने व्यापारिक गतिविधियों के साथ-साथ कला, संस्कृति और समाज कल्याण के कार्यों में अपना जीवन समर्पित किया। दोनों भाइयों के नेतृत्व और परोपकारी सोच ने टाटा समूह को भारत के सबसे भरोसेमंद औद्योगिक घरानों में स्थापित कर दिया।
टिप्पणियाँ
अभी तक कोई टिप्पणी नहीं। सबसे पहले प्रतिक्रिया दें।