भारतीय संगीत की प्राचीनता और इतिहास

संगीत मनुष्य की चेतना और भावनाओं की अभिव्यक्ति का सबसे सुंदर माध्यम रहा है। जब हम संगीत के आरंभ और इसके इतिहास की बात करते हैं, तो भारतीय संस्कृति में इसकी जड़ें अत्यंत प्राचीन काल में पाई जाती हैं। भारतीय संगीत का आदि रूप वेदों में मिलता है। यद्यपि वैदिक काल के सटीक समय को लेकर विद्वानों में मतभेद रहे हैं, लेकिन इस बात पर सर्वसम्मति है कि इसका काल ईसा से लगभग 2000 वर्ष पूर्व का था। इसी आधार पर भारतीय संगीत का गौरवशाली इतिहास कम से कम 4000 वर्ष प्राचीन माना जाता है।

वैदिक साहित्य, विशेषकर सामवेद, में संगीत के व्यावहारिक और आध्यात्मिक पहलुओं का सुंदर समावेश देखने को मिलता है। उस दौर में मंत्रों का उच्चारण विशेष लय और तालबद्ध स्वर में किया जाता था। प्राचीन ग्रंथों में वाण, वीणा और कर्करि जैसे तंतु (तार वाले) वाद्यों का स्पष्ट उल्लेख मिलता है। ये वाद्ययंत्र इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण हैं कि उस युग में भी संगीत के सुर, ताल और वाद्य-निर्माण की कला काफी विकसित हो चुकी थी।

समय के साथ यह परंपरा ऋषियों और गुणी संगीतकारों के माध्यम से समृद्ध होती गई और नाट्यशास्त्र जैसे ग्रंथों के ज़रिए आज के शास्त्रीय संगीत के रूप में ढली। अतः भारतीय संगीत किसी एक दिन की खोज नहीं, बल्कि सहस्राब्दियों से चली आ रही एक अनवरत सांस्कृतिक साधना है।

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