भारतीय संगीत में सरगम का महत्व

भारतीय संगीत का आधार सरगम है, जो सुरों को समझने और गाने का सबसे सरल माध्यम माना जाता है। सरगम वास्तव में संगीत के पहले चार सुरों—सा, रे, ग, म—के पहले अक्षरों को मिलाकर बना एक संक्षिप्त रूप (Abbreviation) है। जिस तरह भाषा को सीखने के लिए वर्णमाला की आवश्यकता होती है, उसी तरह संगीत को गहराई से समझने के लिए सरगम ही पहला कदम है।

संगीत में मुख्य रूप से सात शुद्ध सुर होते हैं: षडज् (सा), ऋषभ (रे), गांधार (ग), मध्यम (म), पंचम (प), धैवत (ध) और निषाद (नि)। इन सात सुरों के समूह को 'सप्तक' कहा जाता है।

सुरों के मुख्य प्रकारों की बात करें तो इन्हें दो श्रेणियों में बांटा जाता है: अचल स्वर और चल स्वर'सा' और 'प' अपनी जगह पर स्थिर रहते हैं, इसलिए इन्हें अचल स्वर कहते हैं। वहीं रे, ग, म, ध, और नि अपनी स्थिति बदलते हैं, जिन्हें चल स्वर कहा जाता है। इन्हीं के अंतर्गत कोमल और तीव्र स्वर आते हैं, जो कुल मिलाकर 12 स्वरों का एक संपूर्ण चक्र बनाते हैं।

यह भी देखें

विस्तृत लेख

संबंधित विषय