सरसों की खेती: सिंचाई और सही पानी का प्रबंधन

सरसों की फसल से बंपर पैदावार लेने के लिए सही समय पर सिंचाई और खरपतवारों का समय रहते नियंत्रण करना बेहद आवश्यक है। आमतौर पर सरसों की अच्छी फसल के लिए 2 से 3 बार सिंचाई की जरूरत होती है। पहली सिंचाई बुआई के 20-25 दिन बाद (शाखाएं निकलते समय) और दूसरी सिंचाई फलियां बनते समय (50-55 दिन बाद) करनी चाहिए।

फसल की शुरुआती अवस्था में खरपतवार पौधों की वृद्धि को रोकते हैं। खरपतवार प्रबंधन के लिए बुआई के बाद लेकिन बीजों के उगने से पहले पेण्डीमिथेलीन 30 ई.सी. (Pendimethalin 30 EC) शाकनाशी का छिड़काव करना चाहिए। इसके लिए प्रति हेक्टेयर 750 ग्राम सक्रिय तत्व (लगभग 3 लीटर दवा) की आवश्यकता होती है।

इस दवा का बेहतर परिणाम पाने के लिए इसे 500 से 700 लीटर पानी में अच्छी तरह घोलकर प्रति हेक्टेयर के हिसाब से छिड़काव करें। पर्याप्त मात्रा में पानी का उपयोग करने से दवा पूरे खेत में समान रूप से फैलती है और खरपतवार बीजों को अंकुरित होने से रोकती है, जिससे आपकी फसल स्वस्थ और सुरक्षित रहती है।

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