सुंदर सृष्टि की कीमत

सुंदर सृष्टि हमेशा बलिदान खोजती है। यह बलिदान चाहे एक ईंट का हो, या किसी महान व्यक्ति का। इतिहास गवाह है कि जहाँ सुंदरता, प्रगति या समाज का निर्माण हुआ है, वहाँ किसी न किसी की चुपचाप बही लहू की कीमत जुड़ी है।

सच्चाई यह है कि सुंदर समाज कभी आसानी से नहीं बनता। उसके लिए तपस्या करने वाले लोग होते हैं—जो शोर नहीं मचाते, लेकिन अपनी चुप्पी में आग लिए रहते हैं। ये वे मूक शहीद होते हैं जिन्हें इतिहास कभी नाम नहीं देता, लेकिन उनके बलिदान पर ही नए जमाने टिके होते हैं।

7 जून 2021 को भी इस बात की गहराई समझी गई—समाज के निर्माण में अक्सर वह लोग भूल जाए जाते हैं जिन्होंने सब कुछ दे दिया। लेकिन उनकी चुप्पी भी एक संदेश होती है—कि सच्ची प्रगति बिना त्याग के नहीं आती।

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