भारतीय संगीत के सात स्वर और उनके पूरे नाम
भारतीय शास्त्रीय संगीत की सुरीली दुनिया मुख्य रूप से सात स्वरों पर टिकी हुई है। जिन्हें हम बोलचाल और गायन में सा, रे, ग, म, प, ध, नि कहते हैं, वे वास्तव में इन स्वरों के संक्षिप्त रूप हैं। संगीत की गहरी समझ और साधना के लिए इन सभी स्वरों के पूर्ण नामों को जानना अत्यंत आवश्यक है।
इन सातों स्वरों के पूरे नाम इस प्रकार हैं:
1. सा - षड्ज: यह संगीत का पहला और आधार स्वर माना जाता है, जिससे बाकी स्वरों का जन्म होता है।
2. रे - ऋषभ: यह दूसरा स्वर है, जो गायन में भाव और गहराई जोड़ने का काम करता है।
3. ग - गंधार: तीसरे स्वर को गंधार कहा जाता है, जो धुन में मधुरता लाता है।
4. म - मध्यम: यह चौथा और मध्य का स्वर है, जो रागों के स्वरूप को तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
5. प - पंचम: पांचवें स्वर को पंचम कहते हैं। 'सा' की तरह ही 'प' को भी अचल स्वर माना गया है।
6. ध - धैवत: यह छठा स्वर है, जो संगीत की रचना को स्थिरता प्रदान करता है।
7. नि - निषाद: यह सातवां और अंतिम स्वर है, जिसके बाद पुनः अगला सप्तक शुरू होता है।
इन सातों स्वरों के समूह को सप्तक कहा जाता है। जब कोई साधक इन स्वरों के अर्थ और उनके प्राकृतिक स्वभाव को समझकर निरंतर रियाज़ करता है, तब संगीत का वास्तविक सौंदर्य निखर कर सामने आता है।
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