'हम भारत के लोग': भारतीय संविधान की आत्मा और उसका महत्व
भारतीय संविधान की प्रस्तावना की शुरुआत 'हम भारत के लोग' शब्दों से होती है। यह केवल कुछ शब्द नहीं हैं, बल्कि यह हमारे लोकतंत्र की बुनियाद हैं। यह वाक्य मूल रूप से अमेरिका के संविधान से प्रेरित होकर लिया गया है। लेकिन भारतीय संदर्भ में इसका एक बेहद गहरा और खास अर्थ है।
इन शब्दों का सीधा मतलब यह है कि भारत में अन्तिम सत्ता और सर्वोच्च शक्ति देश की जनता में निहित है। भारत का संविधान किसी राजा, बाहरी ताकत या शासक ने नहीं, बल्कि खुद भारत के लोगों ने अपने प्रतिनिधियों के माध्यम से तैयार किया और खुद को समर्पित किया है। देश की सरकार और व्यवस्था जनता के प्रति ही जवाबदेह होती है।
इसी के साथ जुड़ा है 'सम्पूर्ण प्रभुत्व सम्पन्न' (सम्प्रभुता) का सिद्धांत। इसका अर्थ है कि भारत एक पूरी तरह से आजाद मुल्क है। चाहे देश के भीतर का कोई मामला हो या विदेशी देशों के साथ संबंध बनाने की बात, भारत अपने सारे निर्णय लेने के लिए पूरी तरह से स्वतन्त्र है। किसी भी बाहरी शक्ति या दबाव का हमारे देश के फैसलों पर कोई नियंत्रण नहीं है। यही कारण है कि 'हम भारत के लोग' शब्द हमारे देश की एकता, संप्रभुता और लोकतांत्रिक शक्ति का सबसे बड़ा प्रतीक माने जाते हैं।
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