हरे आलू सेहत के लिए क्यों नुकसानदायक हैं?

क्या आपने कभी ध्यान दिया है कि कुछ आलू हरे रंग के क्यों हो जाते हैं? जब आलू सूरज की रोशनी या तेज कृत्रिम प्रकाश के संपर्क में आते हैं, तो उनमें क्लोरोफिल बनने लगता है, जिससे उनका रंग हरा हो जाता है। हालांकि रंग बदलना तो आम बात है, लेकिन यह इस बात का संकेत भी है कि आलू के अंदर रासायनिक बदलाव हो चुके हैं।

शोध के अनुसार, हरे आलुओं में सोलैनाइन (Solanine) नामक एक प्राकृतिक जहरीला तत्व बहुत अधिक मात्रा में पैदा हो जाता है। यह पौधे का अपना सुरक्षा तंत्र होता है जो उसे कीड़ों और जानवरों से बचाता है, लेकिन इंसानों के लिए यह हानिकारक साबित हो सकता है।

अगर कोई व्यक्ति ज्यादा मात्रा में सोलैनाइनयुक्त हरा आलू खा ले, तो उसे पेट में दर्द, उल्टी, मितली, दस्त या सिरदर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए, यदि आलू का कोई हिस्सा हरा पड़ गया हो या उसमें से अंकुर निकल आए हों, तो बेहतर यही है कि उस हिस्से को छीलकर पूरी तरह हटा दें या उस आलू का इस्तेमाल करने से बचें। थोड़ी सी सावधानी बरतकर आप अपने परिवार को फूड पॉइजनिंग से सुरक्षित रख सकते हैं।

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