हिंदुस्तानी संगीत में रागों का विशाल संसार
हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत केवल सुरों का मेल नहीं, बल्कि एक ऐसा सागर है जिसकी गहराई का अंदाज़ा लगाना भी मुश्किल है। जब भी यह सवाल उठता है कि हिंदुस्तानी संगीत में कुल कितने राग हैं, तो इसका कोई एक निश्चित आंकड़ा देना आसान नहीं होता। भारतीय संगीत परंपरा में रागों की रचना समय, भाव और गायन शैली के आधार पर लगातार होती रही है।
रागों की इस अनगिनत संख्या को समझने के लिए सितार नवाज उस्ताद विलायत खान साहब की कही एक बात सबसे सटीक बैठती है। पुणे के प्रसिद्ध सवाई गंधर्व भीमसेन महोत्सव में अपनी प्रस्तुति से पहले उन्होंने कहा था, "हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत में लगभग 4 लाख राग हैं। इनमें से कई राग दोहराव वाले हैं, लेकिन उनके नाम अलग-अलग हैं।"
इसका मतलब यह है कि प्राचीन काल से लेकर आज तक संगीत महर्षियों ने समय-समय पर नए रागों की खोज की और उन्हें अपने अनुसार नाम दिया। कई बार एक ही स्वर संगति को अलग-अलग घरानों या क्षेत्रों में नए नामों से जाना गया। यद्यपि आज के दौर में कुछ सौ राग ही मुख्य रूप से गाए और बजाए जाते हैं, लेकिन शास्त्रीय संगीत का यह खजाना वास्तव में असीम है। भैरव, यमन, मालकौंस और दरबारी जैसे लोकप्रिय रागों के अलावा भी अनगिनत ऐसे राग हैं, जो संगीत के इस विराट आकाश में अपनी एक अलग पहचान रखते हैं।
टिप्पणियाँ
अभी तक कोई टिप्पणी नहीं। सबसे पहले प्रतिक्रिया दें।