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भारत का पहला कंप्यूटर TIFRAC नहीं, बल्कि 1955 में भारतीय सांख्यिकी संस्थान (ISI) कोलकाता में स्थापित HEC-2M था, जिसे ब्रिटेन से आयात किया गया था। हालाँकि, अगर हम पूरी तरह स्वदेशी निर्मित डिजिटल कंप्यूटर की बात करें, तो वह TIFRAC (Tata Institute of Fundamental Research Automatic Calculator) था, जो 1960 में टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च में पूरी तरह तैयार हुआ। आधुनिक डिजिटल भारत की नींव इन्हीं दो शुरुआती मशीनों पर टिकी है। लोग अक्सर PARAM 8000 को भारत का पहला कंप्यूटर समझ लेते हैं, जबकि वह वास्तव में भारत का पहला स्वदेशी सुपरकंप्यूटर था, जिसे 1991 में बनाया गया था। इस बुनियादी ऐतिहासिक अंतर को समझना बेहद जरूरी है।
कंप्यूटिंग इतिहास के मुख्य आंकड़े और तथ्य
भारत में कंप्यूटर युग की शुरुआत किसी चमत्कार से कम नहीं थी। जब पूरी दुनिया द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद संभल रही थी, तब भारतीय वैज्ञानिकों ने भविष्य की भाषा को पहचान लिया था। 1955 में कोलकाता के भारतीय सांख्यिकी संस्थान में HEC-2M कंप्यूटर स्थापित हुआ, जिसने भारत में इलेक्ट्रॉनिक गणना के द्वार खोले। इसके ठीक एक साल बाद, 1956 में ISI कोलकाता में ही URAL नाम का दूसरा कंप्यूटर रूस से लाया गया, जो वैक्यूम ट्यूब पर आधारित एक विशालकाय मशीन थी।
इसके बाद आया स्वर्णिम वर्ष 1960, जब होमी भाभा के मार्गदर्शन में भारतीय वैज्ञानिकों ने TIFRAC का निर्माण पूर्ण किया। TIFRAC की प्रोसेसिंग क्षमता आज के एक साधारण कैलकुलेटर से भी कम थी, लेकिन उस दौर में यह 1024 शब्दों की फेराइट कोर मेमोरी के साथ काम करता था, जो तत्कालीन वैज्ञानिक शोधों के लिए एक अभूतपूर्व उपलब्धि मानी जाती थी। इसके बाद 1991 में सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग (C-DAC) ने परम 8000 बनाकर अमेरिका के प्रतिबंधों का मुंहतोड़ जवाब दिया था।
मुख्य दावेदारों की तुलना: HEC-2M, TIFRAC और PARAM 8000
भारत के पहले कंप्यूटर का ताज किसे मिलना चाहिए, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप किस श्रेणी की बात कर रहे हैं। अक्सर आम लोग और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्र इस विषय में उलझ जाते हैं। आइए तीनों प्रमुख दावेदारों का तुलनात्मक विश्लेषण करें:
1. HEC-2M (प्रथम आयातित कंप्यूटर): यह मशीन ब्रिटेन के एंड्रयू बूथ द्वारा डिजाइन की गई थी। 1955 में भारत पहुंची यह मशीन आकार में एक बड़े कमरे जितनी थी। इसका मुख्य उद्देश्य जटिल सांख्यिकी और गणितीय गणनाओं को हल करना था। यह भारत की धरती पर काम करने वाला पहला डिजिटल कंप्यूटर माना जाता है।
2. TIFRAC (प्रथम स्वदेशी कंप्यूटर): यदि सवाल यह है कि भारत में निर्मित पहला कंप्यूटर कौन सा था, तो जवाब निस्संदेह TIFRAC होगा। 1955 से 1960 के बीच मुंबई में निर्मित इस मशीन को भारतीय इंजीनियरों ने स्क्रैच से तैयार किया था। इसमें 2000 से अधिक वैक्यूम ट्यूब्स का उपयोग हुआ था।
3. PARAM 8000 (प्रथम स्वदेशी सुपरकंप्यूटर): जब 1980 के दशक में अमेरिका ने भारत को क्रै (Cray) सुपरकंप्यूटर देने से मना कर दिया, तब भारत ने स्वयं का सुपरकंप्यूटर बनाने का फैसला किया। विजय भटकर के नेतृत्व में 1991 में बना PARAM 8000 भारत का पहला सुपरकंप्यूटर था, न कि पहला सामान्य कंप्यूटर।
इतिहास को समझने में गफलत: कहाँ होती है चूक?
भारतीय कंप्यूटर इतिहास का अध्ययन करते समय सबसे बड़ी गलती शब्दावली को नजरअंदाज करना है। अक्सर वेबसाइट्स और सामान्य ज्ञान की किताबों में "पहला कंप्यूटर" और "पहला सुपरकंप्यूटर" के बीच की रेखा धुंधली कर दी जाती है। जब आप इंटरनेट पर खोजते हैं, तो कई ब्लॉग बिना किसी संदर्भ के सीधे "परम 8000" को भारत का पहला कंप्यूटर घोषित कर देते हैं, जो ऐतिहासिक रूप से पूरी तरह गलत और भ्रामक है।
दूसरी बड़ी चूक आयातित कंप्यूटर और स्वदेशी कंप्यूटर के अंतर को न समझना है। HEC-2M भारत का पहला कंप्यूटर जरूर था, लेकिन वह भारतीय तकनीक का उत्पाद नहीं था। यदि आप किसी शोध पत्र या परीक्षा में लिख रहे हैं, तो हमेशा यह स्पष्ट करें कि आप प्रथम आयातित (Imported), प्रथम स्वदेशी (Indigenous) या प्रथम सुपरकंप्यूटर (Supercomputer) की बात कर रहे हैं। इस सूक्ष्म अंतर को भूलना आपके तकनीकी ज्ञान की साख को प्रभावित कर सकता है।
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