जब आप पैर जमीन पर पटकते हैं, तो आपको लगता है कि पृथ्वी बस इतनी ही है। मगर रुकिए। हमारी धरती प्याज के छिलकों जैसी परतों में लिपटी है, और अगर हम सबसे अधिक आयतन या मोटाई वाली परत की बात करें, तो वह मैंटल (Mantle) है। पृथ्वी के कुल आयतन का लगभग ८४ प्रतिशत हिस्सा इसी अकेले मैंटल के पास है। हालांकि, अगर हम केवल इंसानी जीवन और सबसे ऊपरी सतह की बात करें, तो वह 'भूपर्पटी' यानी क्रस्ट है। लेकिन असल मायनों में, पूरी धरती पर मैंटल का ही राज है।
ब्रह्मांडीय धूल से बनी परतों का अनोखा इतिहास और बुनियादी ढांचा
करीब साढ़े चार अरब साल पहले, अंतरिक्ष में तैरती धूल और गैस के कण आपस में टकराए। एक दहकता हुआ गोला बना। गुरुत्वाकर्षण ने भारी तत्वों जैसे लोहे और निकल को केंद्र की तरफ खींच लिया, जिससे कोर बना। जो हल्के तत्व थे, वे ऊपर तैरने लगे। इसी प्राकृतिक मथने की प्रक्रिया से हमारी धरती तीन मुख्य परतों में बंट गई: क्रस्ट, मैंटल और कोर। यह विभाजन सिर्फ ऊपर-नीचे का नहीं है, बल्कि इनके रासायनिक गुणों में जमीन-आसमान का अंतर है।
क्रस्ट वह पतली सी पपड़ी है जिस पर हम शहर बसाते हैं, नदियां बहती हैं और समंदर लहराते हैं। इसकी मोटाई महासागरों के नीचे महज ५ किलोमीटर से लेकर पर्वतों के नीचे ७० किलोमीटर तक ही है। इसके ठीक नीचे शुरू होती है मैंटल की महाकाय सल्तनत। २९०० किलोमीटर की गहराई तक फैली यह परत इतनी विशाल है कि इसके सामने क्रस्ट की हैसियत अंडे के छिलके जितनी भी नहीं है। वैज्ञानिकों ने जब भूकंपीय तरंगों के पृथ्वी के आर-पार जाने की गति को नापा, तब जाकर इस छिपे हुए साम्राज्य का पता चला।
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