दुनियाभर में हर साल लाखों लोग विदेश यात्रा का सपना देखते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक नवजात शिशु को भी दूसरे देश की सीमा में कदम रखने के लिए वैध पासपोर्ट और वीजा की आवश्यकता होती है? वीजा बनवाने के लिए किसी भी व्यक्ति की न्यूनतम आयु की कोई बाध्यता नहीं है; शून्य वर्ष यानी जन्म के तुरंत बाद से ही वीजा बनवाया जा सकता है। हालांकि, कानूनी प्रक्रियाएं और आवेदन के अधिकार उम्र के पड़ावों के हिसाब से पूरी तरह बदल जाते हैं।

वीजा नियमों की पृष्ठभूमि और कानूनी आधार

अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (ICAO) और विभिन्न राष्ट्रों के संप्रभु कानून यह स्पष्ट करते हैं कि प्रत्येक यात्री की एक स्वतंत्र पहचान होनी चाहिए। पुराने दौर में माता-पिता के पासपोर्ट पर ही बच्चों का नाम दर्ज कर दिया जाता था, लेकिन 11 सितंबर 2001 की घटनाओं के बाद वैश्विक सुरक्षा चिंताओं के कारण इस व्यवस्था को समाप्त कर दिया गया। अब हर व्यक्ति, चाहे उसकी उम्र कुछ दिन हो या 90 वर्ष, उसका अपना पासपोर्ट और वीजा होना अनिवार्य है। नाबालिकों (18 वर्ष से कम आयु) के मामले में मुख्य कानूनी चुनौती सहमति और सुरक्षा की होती है। दुनिया भर की सरकारें यह सुनिश्चित करना चाहती हैं कि किसी भी बच्चे का अवैध व्यापार या माता-पिता में से किसी एक द्वारा बिना अनुमति अपहरण न किया जाए। इसी कारण से 18 साल से कम उम्र के आवेदकों के लिए माता-पिता की लिखित सहमति, उनके वित्तीय दस्तावेज और कानूनी अभिभावक के साक्ष्य प्रस्तुत करना अनिवार्य कर दिया गया है। 18 वर्ष की आयु प्राप्त करते ही व्यक्ति कानूनी रूप से वयस्क माना जाता है और वह बिना किसी अभिभावक की संस्तुति के स्वतंत्र रूप से वीजा आवेदन करने का हकदार बन जाता है।

विभिन्न आयु वर्गों के लिए वीजा आवेदन की विस्तृत प्रक्रिया

उम्र के हिसाब से वीजा प्रक्रिया में मुख्य रूप से तीन चरण शामिल होते हैं:

पहला चरण (0 से 5 वर्ष): इस आयु वर्ग में बच्चे का पासपोर्ट और फोटो जमा करना होता है। आमतौर पर इस उम्र के बच्चों के बायोमेट्रिक (फिंगरप्रिंट) नहीं लिए जाते। माता-पिता को दूतावास में आवेदन पत्र पर हस्ताक्षर करने होते हैं और यात्रा के पूरे खर्च का उत्तरदायित्व उठाना पड़ता है।

दूसरा चरण (6 से 17 वर्ष): इस वर्ग में आने वाले नाबालिगों के बायोमेट्रिक आंकड़े दूतावास के नियमों के अनुसार दर्ज किए जा सकते हैं। यदि बच्चा अकेले या केवल एक माता-पिता के साथ यात्रा कर रहा है, तो गैर-यात्रा करने वाले माता-पिता से 'नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट' (NOC) और एक नोटरीकृत हलफनामा अनिवार्य रूप से मांगा जाता है। इसके साथ ही शैक्षणिक संस्थान से छुट्टी का पत्र भी जमा करना होता है।

तीसरा चरण (18 वर्ष और उससे अधिक): वयस्क होते ही प्रक्रिया पूरी तरह से व्यक्ति की अपनी वित्तीय स्थिति, रोजगार और निजी दस्तावेजों पर केंद्रित हो जाती है। आवेदक को अपने बैंक खाते का विवरण, आयकर रिटर्न और खुद के हस्ताक्षर के साथ सीधे आवेदन करना होता है, जहां किसी अभिभावक की कानूनी आवश्यकता समाप्त हो जाती है।

व्यावहारिक उदाहरण: एक नाबालिग और वयस्क का वीजा मामला

आइए इसे एक वास्तविक उदाहरण से समझते हैं। 16 वर्षीय रोहन और उसके 20 वर्षीय बड़े भाई अमित दोनों को पढ़ाई के लिए ब्रिटेन (UK) जाना था। अमित ने अपनी विश्वविद्यालय की स्वीकृति, अपने वित्तीय दस्तावेज और बैंक विवरण जमा करके सीधे वीजा के लिए आवेदन किया, क्योंकि वह 18 वर्ष से ऊपर था और कानूनी रूप से वयस्क था।

दूसरी ओर, रोहन के मामले में प्रक्रिया पूरी तरह अलग थी। यद्यपि वीजा रोहन के नाम से ही जारी होना था, लेकिन उसके पिता और माता दोनों को दूतावास के समक्ष सहमति पत्र पर हस्ताक्षर करने पड़े। दूतावास ने रोहन के पिता के स्पॉन्सरशिप लेटर, बैंक स्टेटमेंट और रोहन के स्कूल से अनापत्ति प्रमाण पत्र की गहन जांच की। इस उदाहरण से यह स्पष्ट होता है कि हालांकि वीजा दोनों ही उम्र में बन जाता है, लेकिन 18 वर्ष से कम आयु होने पर जिम्मेदारी पूरी तरह से अभिभावकों के कंधों पर रहती है, जबकि 18 से अधिक आयु होने पर व्यक्ति स्वयं अपनी फाइल के लिए उत्तरदायी होता है।