शिशु के जन्म के बाद शुरुआती महीनों में मां का दूध ही उसका संपूर्ण आहार होता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक अध्ययन के अनुसार मां द्वारा खाए जाने वाले भोजन का स्वाद और असर महज दो घंटे के भीतर उसके दूध में उतर जाता है? यह वैज्ञानिक तथ्य इस बात को साबित करने के लिए काफी है कि इस नाजुक दौर में हर एक निवाला कितनी सावधानी से चुना जाना चाहिए। स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए यह जानना बेहद जरूरी है कि वे अपनी और अपने नन्हे मुन्ने की सेहत को दुरुस्त रखने के लिए अपनी थाली से किन चीजों को पूरी तरह बाहर कर दें।

पारंपरिक खान-पान की भूलभुलैया और आधुनिक पोषण विज्ञान

सदियों से हमारे समाज में जच्चा-बच्चा की सेहत को लेकर तमाम तरह की धारणाएं और नुस्खे चले आ रहे हैं। प्राचीन काल से ही बड़े-बुजुर्ग यह मानते आए हैं कि मां जो खाएगी, उसका सीधा असर शिशु के विकास पर पड़ेगा। दादी-नानी के दौर में मसालों और घी के तमाम पारंपरिक व्यंजन धड़ल्ले से खाए जाते थे, जिनका उद्देश्य शरीर को ताकत देना होता था। समय के साथ चिकित्सा विज्ञान ने इन मान्यताओं में गहराई से झांका और यह स्पष्ट किया कि हर पारंपरिक व्यंजन हर मां के लिए सही नहीं होता। आधुनिक बाल रोग विशेषज्ञों और आहार विशेषज्ञों ने मिलकर यह रेखांकित किया है कि कई खाद्य पदार्थ दूध के रास्ते बच्चे के पेट में पहुंचकर उसे मरोड़, गैस या एलर्जी जैसी गंभीर समस्याओं में झोंक सकते हैं।

पाचन तंत्र से लेकर मां के दूध तक खाद्य पदार्थों का सफर

जब एक स्तनपान कराने वाली महिला भोजन ग्रहण करती है, तो उसका पाचन तंत्र उस भोजन को तोड़कर विभिन्न पोषक तत्वों में विभाजित करता है। ये पोषक तत्व रक्तप्रवाह के माध्यम से उन ग्रंथियों तक पहुंचते हैं जो स्तन दुग्ध का निर्माण करती हैं। इस जटिल जैव रासायनिक प्रक्रिया के दौरान कुछ विशेष यौगिक और रसायन भी दूध में मिल जाते हैं। यदि मां ने अत्यधिक कैफीन, जंक फूड, अल्कोहल या कुछ विशेष एलर्जेन का सेवन किया है, तो वे सीधे शिशु के अविकसित पाचन तंत्र तक पहुंच जाते हैं। चूंकि नवजात शिशु का पेट और आंतें बेहद संवेदनशील होती हैं, इसलिए वे इन बाहरी तत्वों को आसानी से पचा नहीं पाते। यही कारण है कि कुछ खास खाद्य पदार्थों के सेवन से बच्चा अचानक असहज हो जाता है, घंटों रोता है और उसे नींद आने में भी दिक्कत होती है।

एक व्यावहारिक मिसाल: जब अनजाने में बरती गई लापरवाही बनी परेशानी की वजह

शिल्पा हाल ही में मां बनी थीं और वे अपने खान-पान को लेकर बहुत ज्यादा संजीदा नहीं थीं। एक दिन उन्होंने शाम की थकान मिटाने के लिए अत्यधिक कैफीन वाली कॉफी के साथ कुछ पैकेटबंद मसालेदार स्नैक्स खा लिए। उस रात उनके दो महीने के बेटे आरव ने बिना किसी स्पष्ट कारण के लगातार चार घंटे तक चीख-चीख कर रोना शुरू कर दिया। शिल्पा की समझ में कुछ नहीं आ रहा था कि वे उसे कैसे शांत करें। अगले दिन जब वे बाल रोग विशेषज्ञ के पास गईं और अपनी डाइट का जिक्र किया, तो डॉक्टर ने तुरंत कॉफी और अत्यधिक मसालों वाले उन खाद्य पदार्थों को पूरी तरह बंद करने की सलाह दी। जैसे ही शिल्पा ने उन चीजों से तौबा की, आरव की बेचैनी गायब हो गई और वह चैन से सोने लगा। यह घटना इस बात का जीता-जागता प्रमाण है कि आपकी छोटी सी लापरवाही आपके बच्चे के लिए कितनी बड़ी मुसीबत बन सकती है।