नवजात शिशु की देखभाल करना किसी भी माता के लिए एक बेहद संवेदनशील और जिम्मेदारी भरा कार्य होता है।
बच्चों को लेटकर दूध पिलाना: एक आम आदत और उसके पहलू
शिशु को स्तनपान (Breastfeeding) कराते समय सही पोजीशन का चुनाव करना बेहद आवश्यक है।
मुख्य जोखिम और शारीरिक प्रभाव
कान का संक्रमण (Ear Infection): जब बच्चे को पूरी तरह से लेटी हुई अवस्था में दूध पिलाया जाता है, तो दूध का प्रवाह नियंत्रित नहीं रहता।
कई बार दूध कान की यूस्टेशियन ट्यूब (Eustachian Tube) में चला जाता है। नमी और दूध के अवशेषों के कारण वहां बैक्टीरिया पनपने लगते हैं, जिससे बच्चों में कान का संक्रमण (Otitis Media) होने का खतरा बहुत बढ़ जाता है। श्वास नली में दूध जाना (Choking Hazard): लेटकर दूध पिलाने के दौरान कई बार दूध बच्चे के गले में अटक सकता है या उसकी श्वास नली (Windpipe) में जा सकता है।
इससे बच्चे को सांस लेने में अचानक भारी परेशानी, घटन या चोकिंग की गंभीर समस्या हो सकती है। पाचन और गैस की समस्या: गलत शारीरिक स्थिति (Bad Posture) में दूध पीने से बच्चा हवा भी अंदर निगल लेता है, जिसके कारण उसे पेट में दर्द, अत्यधिक गैस और ब्लोटिंग की शिकायत होने लगती है।
शिशु पोषण में सही तकनीक का महत्व
शिशु के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए यह जरूरी है कि उसे दूध पिलाते समय सही एंगल मिले।
विशेषज्ञ सलाह: शिशु रोग विशेषज्ञों का सुझाव है कि दिन के समय हमेशा बच्चे को गोद में लेकर, पीठ को सहारा देकर और सिर को थोड़ा ऊंचा रखकर ही स्तनपान कराना चाहिए।
क्या आप जानना चाहते हैं कि रात के समय स्तनपान कराने के लिए कौन सी सुरक्षित पोजीशन अपनाई जानी चाहिए और इसके क्या अन्य विकल्प मौजूद हैं?
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