डिलीवरी के तुरंत बाद पानी पीने की शुरुआत डॉक्टर की देखरेख में उसी दिन कर दी जाती है, और प्यास रोकने का मिथक वैज्ञानिक दृष्टिकोण से गलत है।
डिलीवरी के बाद पानी पीने की समय-सीमा: मेडिकल तथ्य
प्रसव के बाद शरीर को रिकवरी और स्तनपान (Breastfeeding) के लिए पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थों की आवश्यकता होती है। पानी पीने की शुरुआत डिलीवरी के प्रकार पर निर्भर करती है:
नॉर्मल डिलीवरी (Normal Vaginal Delivery): शिशु के जन्म के 1 से 2 घंटे के भीतर महिला को पानी या हल्का तरल पदार्थ (जैसे सूप या नारियल पानी) दिया जा सकता है।
सिजेरियन डिलीवरी (C-Section): एनेस्थीसिया का असर खत्म होने और आंतों की गतिविधि (Gut motility) सामान्य होने के बाद, आमतौर पर 4 से 6 घंटे बाद डॉक्टर की अनुमति से छोटे-छोटे घूंट में पानी दिया जाता है।
पारंपरिक मिथक बनाम आधुनिक चिकित्सा विज्ञान
भारतीय समाज में अक्सर यह धारणा देखने को मिलती है कि डिलीवरी के बाद 10 से 40 दिनों तक पानी कम पीना चाहिए या बिल्कुल नहीं पीना चाहिए, ताकि पेट बाहर न निकले। चिकित्सा विज्ञान इस बात का पूरी तरह खंडन करता है।
प्रसवोत्तर शरीर के लिए पर्याप्त हाइड्रेशन का महत्व
ब्रेस्ट मिल्क का निर्माण: मां के दूध का मुख्य घटक पानी है। पर्याप्त पानी न पीने से दूध की आपूर्ति (Milk supply) प्रभावित हो सकती है।
कब्ज और बवासीर से बचाव: डिलीवरी के बाद आंतों की गति धीमी हो जाती है। पानी की कमी से गंभीर कब्ज हो सकता है, जो टांकों (Stitches) पर दबाव डालता है।
यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (UTI) का जोखिम कम: प्रसव के बाद मूत्र मार्ग में संक्रमण की संभावना अधिक होती है। पर्याप्त पानी पीने से टॉक्सिन्स बाहर निकलते हैं।
खून के थक्के (Blood Clots) बनने से रोकना: डिलीवरी के बाद महिलाओं में थ्रोम्बोम्बोलिज़्म का खतरा रहता है। हाइड्रेटेड रहने से रक्त संचार सुचारू रहता है।
पानी पीने का सही तरीका और सावधानियां
तापमान: ठंडा या बर्फ का पानी पीने के बजाय गुनगुना (Warm) या सामान्य तापमान का पानी पिएं। गुनगुना पानी पाचन को बेहतर बनाता है।
मात्रा: एक नई मां को प्रतिदिन कम से कम 2.5 से 3 लीटर (8-10 ग्लास) पानी या तरल पदार्थ का सेवन करना चाहिए।
एक साथ न पिएं: पानी को एक बार में बहुत अधिक पीने के बजाय दिन भर छोटे-छोटे घूंट में पिएं।
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