क्या मैं भारत में एक टैंक का मालिक हो सकता हूँ? (एक विधिक और व्यावहारिक विश्लेषण)
प्रस्तावना और पृष्ठभूमि
जब कभी हम भारी सैन्य वाहनों, बख्तरबंद गाड़ियों (Armoured Vehicles) और विशेष रूप से युद्धक टैंकों (Battle Tanks) के बारे में सोचते हैं, तो हमारे मन में सेना, युद्ध के मैदान और राष्ट्रीय सुरक्षा के दृश्य उभर आते हैं। लेकिन क्या कभी आपके मन में यह सवाल आया है कि क्या एक आम नागरिक भारत में कानूनी तौर पर किसी टैंक का मालिक बन सकता है? यह सुनने में भले ही किसी फिल्मी कहानी या कल्पना जैसा लगे, लेकिन सैन्य इतिहास के शौकीनों (Military Enthusiasts) और वाहन संग्राहकों के बीच यह एक बेहद दिलचस्प विषय है।
दुनिया के कुछ देशों जैसे कि संयुक्त राज्य अमेरिका या ब्रिटेन में, कुछ विशेष शर्तों और हथियारों को पूरी तरह से निष्प्रभावी (De-militarize) करने के बाद निजी नागरिकों द्वारा पुराने सैन्य टैंकों को खरीदने और रखने की अनुमति है। लेकिन जब बात हमारे देश भारत की आती है, तो यहाँ कानून, सुरक्षा और प्रशासनिक नियम बेहद कड़े हैं। इस लेख के इस पहले हिस्से में हम इसी बात की गहराई से पड़ताल करेंगे कि भारतीय कानून के तहत एक नागरिक के लिए टैंक का स्वामित्व किस हद तक संभव या असंभव है।
भारतीय कानून और आयुध अधिनियम (The Arms Act, 1959)
भारत में हथियारों, गोला-बारूद और सैन्य उपकरणों के रख-रखाव को नियंत्रित करने वाला सबसे मुख्य कानून भारतीय आयुध अधिनियम, 1959 (The Arms Act, 1959) और इसके नियम हैं।
इस अधिनियम के तहत नागरिकों के लिए छोटे हथियार जैसे कि निश्चित बोर की पिस्तौल या रिवॉल्वर रखने के लिए भी कड़े लाइसेंस की आवश्यकता होती है।
बात जब एक मुख्य युद्धक टैंक (Main Battle Tank) की आती है, तो उसमें 120 मिमी या 125 मिमी जैसी भारी तोपें और खतरनाक हथियार प्रणालियाँ जुड़ी होती हैं।
भारतीय कानून के अंतर्गत किसी भी निजी नागरिक को इस श्रेणी के 'निषिद्ध हथियारों' (Prohibited Arms) और सैन्य आयुध को अपने पास रखने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
यदि कोई व्यक्ति अंतरराष्ट्रीय बाजार से कोई पुराना टैंक खरीद भी ले, तो उसके मुख्य हथियार (Cannons and Guns) को कानूनी रूप से पूरी तरह से नष्ट या स्थायी रूप से निष्क्रिय करना होगा, जो कि टैंक के मूल स्वरूप को ही समाप्त कर देता है।
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