भारत में रुपया कैसे आया?
भारत में रुपया के इतिहास की शुरुआत प्राचीन काल से होती है, लेकिन आधुनिक रुपया की शुरुआत 16वीं सदी में हुई। शेरशाह सूरी, जो 1540 से 1545 तक शासन करते थे, ने चांदी के एक सिक्के को 'रुपैया' के नाम से जारी किया। इस सिक्के का वजन 178 कण (लगभग 11.66 ग्राम) था, जो उस समय व्यापार और लेन-देन के लिए मानक बन गया।
यह रुपैया धीरे-धीरे भारतीय उपमहाद्वीप में प्रचलित हो गया। मुगल बादशाहों ने भी इस प्रणाली को अपनाया और आगे चलकर अंग्रेजों ने भी रुपए को भारत की आधिकारिक मुद्रा के रूप में जारी रखा।
आज का 'रुपया' उसी प्राचीन और मध्यकालीन परंपरा का ही विकसित रूप है। यह नाम संस्कृत के शब्द 'रूप्यक' से आया है, जिसका अर्थ होता है 'चांदी का सिक्का'।
रुपया सिर्फ एक मुद्रा नहीं, बल्कि भारत के ऐतिहासिक, आर्थिक और सांस्कृतिक विकास का भी प्रतीक है। आज भी रुपया देश की पहचान बना हुआ है, चाहे वह सिक्के हों या नोट, हर एक में छुपी है इतिहास की ग
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