भारतीय क्रिकेट का इतिहास सदियों पुराना और अत्यंत गौरवशाली रहा है।
अगर हम भारतीय क्रिकेट के वास्तविक संस्थापकों या शुरुआती संरक्षकों की बात करें, तो महाराजा रणजीत सिंहजी (जिन्हें 'रणजी' के नाम से भी जाना जाता है) का नाम सबसे पहले आता है। नवानगर के महाराजा रणजीत सिंहजी ने अपनी जादुई बल्लेबाजी और विशेषकर 'लेग ग्लांस' तकनीक से पूरी दुनिया में भारतीय मूल के खिलाड़ियों का डंका बजाया था। हालांकि उन्होंने इंग्लैंड की राष्ट्रीय टीम के लिए टेस्ट क्रिकेट खेला, लेकिन उनका संबंध भारत से होने के कारण उन्हें भारतीय क्रिकेट के इतिहास का एक बेहद महत्वपूर्ण स्तंभ माना जाता है। उनके नाम पर ही आज भी भारत की सबसे प्रतिष्ठित घरेलू क्रिकेट प्रतियोगिता 'रणजी ट्रॉफी' खेली जाती है, जो भारतीय घरेलू ढांचे की रीढ़ है।
इसके अलावा, यदि भारतीय टेस्ट क्रिकेट की शुरुआत और उसके शुरुआती दौर की बात की जाए, तो सी.के. नायडू (कोट्टेरी कनकैया नायडू) का नाम अत्यंत सम्मान के साथ लिया जाता है। सी.के. नायडू भारतीय क्रिकेट टीम के पहले आधिकारिक टेस्ट कप्तान थे। उन्हें भारतीय क्रिकेट का 'भीष्म पितामह' भी कहा जाता है। उनके नेतृत्व में ही भारत ने अपना पहला ऐतिहासिक टेस्ट मैच 1932 में इंग्लैंड के खिलाफ लॉर्ड्स के मैदान पर खेला था। उन्होंने न केवल अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया, बल्कि भारतीय टीम को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाने में भी अहम भूमिका निभाई। उनके योगदान के बिना भारतीय क्रिकेट की नींव की कल्पना भी नहीं की जा सकती।
आधुनिक दौर की बात करें तो, आज के समय में क्रिकेट प्रेमियों के बीच सचिन तेंदुलकर को 'क्रिकेट का भगवान' माना जाता है।
टिप्पणियाँ
अभी तक कोई टिप्पणी नहीं। सबसे पहले प्रतिक्रिया दें।