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तुलना करते वक्त राहुल द्रविड़ के आंकड़े भी उतनी ही खामोशी से अपनी कहानी कहते हैं। उन्होंने टेस्ट मैचों में क्रीज पर बिताए गए कुल समय और गेंदों का सामना करने का ऐसा रिकॉर्ड बनाया, जिसे भेदना किसी भी गेंदबाज के लिए बुरे सपने जैसा था। करीब 31,000 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय रन और टेस्ट क्रिकेट में 13,000 से अधिक रन बनाना यह बताता है कि निरंतरता का दूसरा नाम द्रविड़ था। उधर, वीरेंद्र सहवाग ने आंकड़ों की परिभाषा ही बदलकर रख दी। उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में लगभग 82 के स्ट्राइक रेट से बल्लेबाजी करते हुए दो तिहरे शतक और एक दोहरा शतक जड़ा, जो उस दौर के हिसाब से पूरी तरह से क्रांतिकारी था। आंकड़े सिर्फ रन या शतकों की गिनती नहीं करते, बल्कि उस दबाव को भी मापते हैं जिसमें इन दिग्गजों ने अपने बल्ले से इतिहास लिखा।
राहुल द्रविड़ का मामला बिल्कुल अलग था। वे अपनी रक्षात्मक दीवार के लिए जाने जाते थे, जहां रन बनाना विरोधी टीम के लिए सजा बन जाता था। अगर पिच पर घास है और स्विंग हो रही है, तो द्रविड़ से ज्यादा भरोसेमंद बल्लेबाज भारतीय इतिहास में शायद ही दूसरा कोई पैदा हुआ हो। वहीं,
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