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<h1>आईपीएल की दो नई टीमों की भारी-भरकम कीमत और उनका ऐतिहासिक वित्तीय प्रभाव</h1> <p>साढ़े बारह हजार करोड़ रुपये से अधिक की रिकॉर्डतोड़ बोली—जी हाँ, साल 2021 में जब भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने आईपीएल के विस्तार का पासा फेंका, तो किसी ने सोचा भी नहीं था कि दो नई फ्रेंचाइजी इतनी बड़ी रकम में बिकेंगी। उस ऐतिहासिक नीलामी में लखनऊ और अहमदाबाद की टीमों ने खेल जगत के सारे वित्तीय समीकरण बदलकर रख दिए। संक्षिप्त और सीधा जवाब यह है कि इन दो नई टीमों की कुल संयुक्त कीमत 12,715 करोड़ रुपये से भी ज्यादा आंकी गई, जिसने कॉर्पोरेट जगत और खेल प्रेमियों को पूरी तरह अवाक कर दिया।</p> <h2>आईपीएल के विस्तार की पृष्ठभूमि और वह ऐतिहासिक नीलामी</h2> <p>क्रिकेट के गलियारों में जब भी वित्तीय क्रांतियों का जिक्र होता है, तो साल 2008 का वह दौर याद आता है जब इस टी-20 लीग की शुरुआत हुई थी। लेकिन एक दशक से अधिक के सफर के बाद, इस महाकुंभ का पैमाना इतना विराट हो चुका था कि इसमें केवल आठ टीमों का होना अब नाकाफी लगने लगा था। बीसीसीआई ने महत्वाकांक्षी कदम उठाते हुए लीग को और अधिक व्यापक बनाने का निर्णय लिया। इस प्रक्रिया के तहत, दुनिया के सबसे बड़े क्रिकेट स्टेडियमों और उभरते हुए महानगरों को ध्यान में रखते हुए बोलियां आमंत्रित की गईं।</p> <p>शुरुआती दौर में विश्लेषकों का अनुमान था कि प्रत्येक फ्रेंचाइजी के लिए दो से तीन हजार करोड़ रुपये की बोली ही लगेगी। मगर जब दुबई में वित्तीय लिफाफे खोले गए, तो सारे कयास धरे रह गए। आरपीएसजी समूह ने लगभग सात हजार करोड़ रुपये से अधिक झोंककर लखनऊ की कमान संभाली, जबकि सीवीसी कैपिटल ने भी साढ़े पांच हजार करोड़ से ऊपर की रकम खर्च करके अहमदाबाद पर अपना आधिपत्य जमाया। यह सिर्फ एक साधारण टेंडर प्रक्रिया नहीं थी; यह कॉरपोरेट दिग्गजों के बीच अपनी वित्तीय श्रेष्ठता साबित करने का एक ऐसा महासमर था जिसने यह साबित कर दिया कि भारतीय क्रिकेट की इकोनॉमी अब वैश्विक दिग्गजों जैसे प्रीमियर लीग या एनबीए को भी टक्कर देने के लिए पूरी तरह तैयार है।</p>
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