भारत में सबसे अधिक वर्षा कहाँ है? (विशेषज्ञ आलेख - भाग 1)
मावसिनराम और चेरापूंजी: भारत के दो सबसे नम क्षेत्र
भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में सबसे अधिक औसत वार्षिक वर्षा दर्ज करने का गौरव मावसिनराम (Mawsynram) को प्राप्त है। मेघालय के पूर्वी खासी हिल्स (East Khasi Hills) जिले में स्थित यह छोटा सा गाँव अपनी अद्भुत जलवायु के लिए जाना जाता है।
वार्षिक औसत वर्षा: मावसिनराम में औसतन लगभग 11,872 मिलीमीटर (यानी लगभग 12 मीटर) वार्षिक वर्षा होती है, जो इसे पृथ्वी के सबसे आर्द्र (Wettest Place on Earth) स्थानों में से एक बनाती है।
चेरापूंजी (सोहरा) की भूमिका: मावसिनराम से कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर स्थित चेरापूंजी (जिसे स्थानीय रूप से सोहरा भी कहा जाता है) भी अत्यधिक वर्षा के लिए विश्व प्रसिद्ध है। ऐतिहासिक रूप से चेरापूंजी को सबसे नम स्थान माना जाता था, और आज भी कुछ विशिष्ट कालों (जैसे एक वर्ष या एक महीने में सबसे अधिक वर्षा) के रिकॉर्ड इसी के नाम दर्ज हैं।
महत्वपूर्ण तथ्य: मावसिनराम और चेरापूंजी दोनों एक-दूसरे से महज 15-16 किलोमीटर की हवाई दूरी पर स्थित हैं, और दोनों ही पूर्वी खासी पहाड़ियों की श्रृंखला का हिस्सा हैं।
मेघालय की भौगोलिक स्थिति और मानसून का प्रवेश
इन क्षेत्रों में होने वाली भारी बारिश के पीछे भारत की मानसूनी प्रणाली और इस क्षेत्र की विशिष्ट स्थलाकृति (Topography) की सबसे बड़ी भूमिका है।
बंगाल की खाड़ी की शाखा: दक्षिण-पश्चिम मानसून (South-West Monsoon) जब भारतीय उपमहाद्वीप में प्रवेश करता है, तो उसकी एक प्रमुख शाखा बंगाल की खाड़ी के ऊपर से गुजरते हुए उत्तर-पूर्व भारत की ओर बढ़ती है।
मेघालय का पठार: यह मानसूनी हवाएँ बंगाल की खाड़ी से भारी मात्रा में नमी (Moisture) सोख कर आगे बढ़ती हैं और सीधे मेघालय के पठार से टकराती हैं।
पहाड़ियों की कीपनुमा (Funnel-shaped) संरचना: खासी और जयंतिया पहाड़ियों की भौगोलिक बनावट कुछ इस तरह की है कि ये मानसूनी हवाओं को चारों तरफ से जकड़ लेती हैं। हवाएँ इन संकीर्ण घाटियों में फंस जाती हैं और बाहर निकलने का रास्ता न मिलने के कारण ऊपर उठने के लिए मजबूर हो जाती हैं।
पर्वतीय वर्षा (Orographic Rainfall) की क्रियाविधि
मावसिनराम और चेरापूंजी में होने वाली मूसलाधार बारिश मुख्य रूप से पर्वतीय वर्षा या ओरोग्राफिक रेनफॉल (Orographic Rainfall) का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
जब नमी से भरी गर्म हवाएँ धरातल से ऊपर उठती हैं, तो ऊँचाई पर जाने पर तापमान कम होने लगता है। इसके परिणामस्वरूप संघनन (Condensation) की प्रक्रिया तेजी से होती है और बादलों का निर्माण होता है। चूँकि खासी पहाड़ियाँ पूर्व-पश्चिम दिशा में फैली हैं, वे बंगाल की खाड़ी से आने वाली हवाओं के बिल्कुल सामने दीवार की तरह खड़ी रहती हैं। हवाओं को इन पहाड़ियों को पार करने के लिए अत्यधिक ऊँचाई तक पहुँचना पड़ता है, जिससे वहाँ लगातार और भारी मात्रा में वर्षा होती है।
(जारी... आलेख के अगले भाग में हम इन क्षेत्रों की अनूठी जीवनशैली, वनस्पतियों और चरम मानसूनी आंकड़ों का विस्तृत विश्लेषण करेंगे।)
भौगोलिक संरचना और मानसूनी हवाओं का प्रभाव
मेघालय की खासी पहाड़ियों की कीपनुमा (funnel-shaped) भौगोलिक बनावट ही यहाँ अत्यधिक वर्षा का मुख्य कारण है। बंगाल की खाड़ी से उठने वाली मानसूनी हवाएँ जब उत्तर की ओर बढ़ती हैं, तो वे इन संकीर्ण पहाड़ियों के बीच फंस जाती हैं। हवाओं को ऊपर उठने के लिए मजबूर होना पड़ता है, जिससे बादलों का संघनन तेजी से होता है और मूसलाधार बारिश होती है।
जनजीवन और पर्यावरण पर असर
इतनी भारी वर्षा के कारण यहाँ का जनजीवन काफी अनूठा है। स्थानीय निवासी बारिश से बचने के लिए 'कुपैक' (Knup) नामक पारंपरिक ढालनुमा छतरी का उपयोग करते हैं, जो पूरे शरीर को ढक लेती है। इसके अलावा, यहाँ की नदियों और नालों पर पेड़ों की जड़ों को आपस में जोड़कर बनाए गए 'लिविंग रूट ब्रिजेस' (Living Root Bridges) प्रकृति और मानव के अद्भुत तालमेल का अनूठा उदाहरण हैं।
निष्कर्ष
संक्षेप में कहें तो, मासिनराम और चेरापूंजी केवल भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक मौसमी अजूबा हैं। यहाँ की जलवायु, मानसूनी तंत्र और पर्वतीय ढलानों की विशेषता मिलकर इस क्षेत्र को वैश्विक मानचित्र पर सबसे विशिष्ट और वर्षा बहुल क्षेत्र बनाती हैं।
Meghalaya का मौसिनराम, जहां सबसे ज़्यादा बारिश होती है
यह वीडियो मेघालय के मौसिनराम में होने वाली अत्यधिक वर्षा और वहाँ के स्थानीय जनजीवन की वास्तविक झलक दिखाता है।
World Wettest Place Mawsynram : Meghalaya का मौसिनराम, जहां सबसे ज़्यादा बारिश होती है (BBC Hindi) BBC News Hindi · 518K views
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