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उर्वरक, रक्षा उपकरण और भविष्य की व्यापारिक दिशा

कच्चे तेल के अलावा, रूस से भारत के आयात में रासायनिक उर्वरक (Fertilizers) और वनस्पति तेल (Edible/Vegetable Oils) की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारत एक कृषि प्रधान देश है, और यहाँ की विशाल आबादी के लिए खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में उर्वरकों की निरंतर आपूर्ति आवश्यक है। रूस दुनिया के सबसे बड़े उर्वरक उत्पादकों में से एक है, और भारत अपनी कृषि जरूरतों को पूरा करने के लिए पोटेशियम और यूरिया जैसे उर्वरकों का आयात रूस से बड़े पैमाने पर करता है।

इसके अतिरिक्त, ऐतिहासिक रूप से रक्षा उपकरण (Defense Equipment) और सैन्य साजो-सामान भारत-रूस व्यापार की रीढ़ रहे हैं। यद्यपि पिछले कुछ वर्षों में भारत ने अपने रक्षा स्रोतों में विविधता (Diversification) लाई है, फिर भी भारतीय सशस्त्र बलों के बेड़े में शामिल पनडुब्बियां, लड़ाकू विमान (जैसे सुखोई और मिग सीरीज), टैंक और अत्याधुनिक एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम जैसी प्रणालियाँ रूस के साथ हमारे गहरे रणनीतिक संबंधों की गवाही देती हैं। इसके अलावा, रूस से कोकिंग कोल, मोती, कीमती पत्थर, और विभिन्न प्रकार के खनिज एवं धातुएँ (जैसे एल्युमिनियम और स्टील) भी आयात किए जाते हैं, जो भारतीय विनिर्माण उद्योगों को कच्चा माल प्रदान करते हैं।

कुल मिलाकर, रूस से होने वाला यह आयात न केवल भारत की ऊर्जा और कृषि सुरक्षा को मजबूत करता है, बल्कि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय आर्थिक साझेदारी को भी नई ऊंचाइयों पर ले जाता है। आने वाले समय में, भुगतान प्रणालियों के सरल होने और व्यापारिक गलियारों के विस्तार से इस आयात-निर्यात संतुलन के और अधिक सुदृढ़ होने की पूरी संभावना है।

क्या आप भारत और रूस के बीच होने वाले निर्यात (Exports) के बारे में भी विस्तार से जानना चाहते हैं?