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विदेशों में बसे भारतीय दिग्गजों का बुगाटी प्रेम

यदि मुख्य भूमि भारत की सीमाओं से बाहर नजर दौड़ाई जाए, तो कई ऐसे भारतीय मूल के उद्योगपति और एनआरआई (NRI) हैं जिनके कार कलेक्शन में बुगाटी जैसी दुर्लभ हाइपरकार शामिल हैं। इस सूची में सबसे प्रमुख नाम अमेरिका में रहने वाले सफल रियल एस्टेट व्यवसायी मयूर श्री (Mayur Shree) का आता है। वह पहले ऐसे भारतीय मूल के व्यक्ति हैं जिन्होंने दुनिया की सबसे ताकतवर और महंगी कारों में से एक 'बुगाटी शिरॉन' (Bugatti Chiron) खरीदी थी। खबरों के अनुसार, उन्होंने यह शानदार सुपरकार अपने पिता को उपहार में दी थी। कस्टमाइज्ड फीचर्स और पेंट जॉब के साथ इस कार की कीमत 21 करोड़ रुपये से भी अधिक आंकी गई है। मयूर श्री के पास इसके अलावा पोर्श, मैकलैरेन और लैम्बॉर्गिनी जैसी कई अन्य बेशकीमती गाड़ियां भी मौजूद हैं।

इसके अलावा ब्रिटेन (यूके) में रहने वाले प्रसिद्ध भारतीय मूल के उद्यमी रूबेन सिंह (Reuben Singh) का नाम भी इस लिस्ट में सबसे ऊपर आता है। 'द सिंह कलेक्शन' के मालिक रूबेन सिंह के पास बुगाटी कारों का एक अद्भुत और विशाल काफिला है। उनके पास बुगाटी वेरॉन से लेकर अत्याधुनिक बुगाटी डब्ल्यू16 मिस्ट्रल वर्ल्ड रिकॉर्ड एडिशन (Bugatti W16 Mistral World Record Edition) जैसी नायाब हाइपरकार्स हैं, जिनकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत 135 करोड़ रुपये तक आंकी जाती है। यूके और खाड़ी देशों जैसे दुबई में कारोबार करने वाले डॉ. सीजे रॉय (Dr. CJ Roy) जैसे कुछ अन्य एनआरआई उद्योगपतियों के पास भी कस्टमाइज्ड बुगाटी वेरॉन मौजूद है।

भारत में बुगाटी न होने के मुख्य कारण

वर्तमान में मुख्य भारतीय सड़कों पर बुगाटी का कोई आधिकारिक खरीदार या रजिस्टर्ड मॉडल क्यों नहीं है, इसके पीछे कुछ व्यावहारिक कारण हैं। सबसे बड़ा कारण भारत की भौगोलिक स्थिति और सड़कों का बुनियादी ढांचा है। बुगाटी जैसी हाइपरकार्स की बनावट बेहद कम ग्राउंड क्लीयरेंस वाली होती है, जो भारतीय स्पीड ब्रेकर और गड्ढों भरी सड़कों के अनुकूल नहीं है। इसके अलावा, अत्यधिक आयात शुल्क (Import Duty), भारी-भरकम रजिस्ट्रेशन टैक्स और भारत में कंपनी के आधिकारिक सर्विस सेंटर या मेंटेनेंस सपोर्ट का अभाव भी इसे खरीदारों के लिए एक अव्यावहारिक विकल्प बनाता है।

संक्षेप में कहें तो, भले ही मुकेश Ambani या गौतम अडानी जैसे देश के सबसे बड़े उद्योगपतियों के पास दुनिया की अन्य तमाम अल्ट्रा-लग्जरी कारें मौजूद हों, लेकिन भारत की मुख्यभूमि पर आज भी बुगाटी का कोई आधिकारिक स्वामित्व दर्ज नहीं है। हालांकि, विदेशों में अपनी सफलता का परचम लहरा रहे भारतीय मूल के कुछ दिग्गजों ने जरूर इस अद्भुत इंजीनियरिंग का आनंद अपने गैराज में शामिल करके देश का नाम रोशन किया है।