सीधा और कड़वा जवाब यह है कि आधिकारिक तौर पर दुनिया का कोई भी सभ्य देश अपनी सीमाओं के भीतर लड़कियों की खरीद-फरोख्त की इजाजत नहीं देता, लेकिन हकीकत के पन्ने पलटें तो दक्षिण-पूर्व एशिया के म्यांमार, थाईलैंड और कंबोडिया से लेकर पूर्वी यूरोप के मोल्दोवा और यूक्रेन जैसे देश मानव तस्करी के सबसे बड़े गढ़ बन चुके हैं। गरीबी, युद्ध और भ्रष्टाचार ने इन देशों को ऐसे दलदल में धकेल दिया है जहां मासूम जिंदगियों की कीमत चंद नोटों में तय की जाती है, जो कि आधुनिक युग का सबसे वीभत्स चेहरा है।

गुलामी का आधुनिक संस्करण: आखिर यह धंधा फलता-फूलता क्यों है?

जब हम यह सवाल पूछते हैं कि लड़कियां कहां बिकती हैं, तो हमें उन बुनियादी ढांचों को समझना होगा जो इस घिनौने व्यापार को खाद-पानी देते हैं। यह केवल एक देश की समस्या नहीं है, बल्कि एक वैश्विक जाल है। मानव तस्करी (Human Trafficking) की जड़ें वहां गहरी होती हैं जहां कानून अंधा होता है और पेट की भूख नैतिकता पर हावी हो जाती है। विशेष रूप से उन क्षेत्रों में जहां सशस्त्र संघर्ष या गृहयुद्ध की स्थिति होती है, वहां सामाजिक सुरक्षा का ढांचा पूरी तरह चरमरा जाता है।

एक बहुत ही बारीक लेकिन महत्वपूर्ण पहलू है 'मांग और आपूर्ति' का गणित। पश्चिम के विकसित देशों और खाड़ी के कुछ हिस्सों में अवैध यौन सेवाओं की जो मांग है, उसे पूरा करने के लिए गरीब देशों की लड़कियों को "बेहतर भविष्य" या "नौकरी" का झांसा देकर फंसाया जाता है। म्यांमार और बांग्लादेश के शरणार्थी शिविरों से लेकर नेपाल के दुर्गम गांवों तक, बिचौलिए सक्रिय हैं जो मासूमों को चंद रुपयों के बदले अपराधियों के हवाले कर देते हैं। इसे केवल अपराध नहीं, बल्कि एक संगठित अंतरराष्ट्रीय उद्योग की तरह चलाया जा रहा है, जिसकी सालाना कमाई अरबों डॉलर में है। अराजकता का लाभ उठाकर ये माफिया तंत्र सीमाओं को लांघ जाते हैं, और जिस देश में कानून का खौफ कम होता है, वहां ये मंडियां सरेआम सजने लगती हैं।

भू-राजनीतिक अस्थिरता और तस्करी के मुख्य गलियारे

इतिहास गवाह है कि जब भी किसी देश की अर्थव्यवस्था चरमराई है, वहां की महिलाएं और बच्चे सबसे पहले शिकार हुए हैं। सोवियत संघ के पतन के बाद, पूर्वी यूरोप का एक बड़ा हिस्सा तस्करी का हॉटस्पॉट बन गया। आज भी, मोल्दोवा और यूक्रेन जैसे देशों की आर्थिक बदहाली का फायदा उठाकर तस्कर सक्रिय रहते हैं। इन क्षेत्रों में लड़कियों को 'मॉडलिंग' या 'वेट्रेस' की नौकरी का लालच दिया जाता है, लेकिन सीमा पार करते ही उनके पासपोर्ट छीन लिए जाते हैं और उन्हें देह व्यापार के नरक में झोंक दिया जाता है।