धारा 107 आईपीसी: कब लागू होती है?

भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 107 उस स्थिति में लागू होती है जब कोई व्यक्ति किसी अपराध के लिए दूसरे को उकसाता या प्रेरित करता है। यह धारा दुष्प्रेरण (Abetment) के बारे में है, जिसका मतलब है कि कोई व्यक्ति दूसरे को कानून के खिलाफ कार्य करने के लिए प्रभावित करे।

मसलन, अगर कोई व्यक्ति किसी को चोरी करने, हिंसा करने या किसी गैरकानूनी काम को अंजाम देने के लिए प्रेरित करता है, तो वह खुद अपराध करने वाले के साथ बराबर दोषी माना जा सकता है। धारा 107 के तहत, उकसावे वाला व्यक्ति भी उतना ही जिम्मेदार होता है जितना कि अपराध को अंजाम देने वाला।

इस धारा का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि केवल सीधे तौर पर अपराध करने वाला ही नहीं, बल्कि उसके पीछे छिपे लोग भी कानून की नजर में आएं। उदाहरण के लिए, अगर किसी ने किसी को हत्या के लिए उकसाया और वह व्यक्ति उस प्रेरणा में आकर अपराध करता है, तो उकसाने वाला भी इस धारा के तहत दंडनीय हो

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