भारतीय दंड संहिता की धारा 142 क्या है?

IPC की धारा 142 भारतीय दंड संहिता में एक महत्वपूर्ण प्रावधान है, जो गैरकानूनी जमाव में सक्रिय रूप से शामिल होने वाले व्यक्ति के खिलाफ लागू होती है। इसके मुताबिक, अगर कोई व्यक्ति जानबूझकर किसी अवैध जमाव में शामिल होता है, यह जानते हुए कि वह जमाव कानून के खिलाफ है, तो वह अपराध का दोषी माना जाएगा।

इस धारा का मकसद सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना और हिंसा या अशांति की स्थिति से बचना है। उदाहरण के लिए, अगर कोई भीड़ बिना अनुमति के इकट्ठा हो और किसी भी तरह कानून की उल्लंघन करे, तो ऐसे में शामिल हर व्यक्ति को इस धारा के तहत दोषी माना जा सकता है, खासकर अगर उसे पता है कि वह अवैध है।

इस अपराध की सजा छह महीने तक की जेल या जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। यह धारा न केवल दंगों या प्रदर्शनों में बर्बरता रोकने में मदद करती है, बल्कि आम नागरिकों को भी यह समझने में सहायता करती है कि सार्वजनिक आचरण में जिम्मेदारी का मह

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