1947 में भारत का राजनीतिक स्वरूप
सन् 1947 में जब हमारा देश भारत ब्रिटिश शासन की गुलामी से आज़ाद हुआ, तब वर्तमान समय की तरह यहाँ सीधे तौर पर राज्य नहीं थे। उस समय देश छोटे-बड़े हिस्सों में बँटा हुआ था और कुल 562 रियासतें हुआ करती थीं। इन रियासतों की अपनी व्यवस्था थी, जो देश के इतिहास का एक बहुत ही महत्वपूर्ण और दिलचस्प हिस्सा है।
आज़ादी के वक्त इन रियासतें की स्थिति आज के राज्यों से बिल्कुल अलग थी। अधिकांश रियासतों ने ब्रिटिश सरकार के साथ मिलकर जनता को लोकसेवा प्रदान करने और कर यानी टैक्स वसूलने का एक तरह से 'ठेका' ले लिया था। कुल 565 रियासतों में से सिर्फ 21 रियासतें ऐसी थीं जहाँ नियमित सरकारें काम कर रही थीं। बाकी क्षेत्रों पर राजाओं और नवाबों का सीधा शासन था।
अगर क्षेत्रफल की बात करें, तो उस समय की रियासतों में से केवल तीन रियासतें आकार में बहुत बड़ी थीं, जिनके नाम मैसूर, हैदराबाद और कश्मीर थे। इन बड़ी रियासतों का भौगोलिक और सामरिक दोनों ही दृष्टियों से देश में बहुत बड़ा महत्व था। बाद में इन सभी रियासतों को सरदार वल्लभभाई पटेल के अथक प्रयासों से भारतीय संघ में मिलाया गया, जिससे आज का एक अखंड भारत बनकर तैयार हुआ।
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