क्या भारत सचमुच एक गरीब देश है?
अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या भारत आज भी एक गरीब देश है। साल 2022 की वैश्विक बहुआयामी गरीबी सूचकांक (MPI) रिपोर्ट के अनुसार, गरीबी को केवल कम आमदनी से नहीं मापा जा सकता। इसमें स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर जैसे तीन महत्वपूर्ण आयामों को शामिल किया जाता है, जिनके भीतर 10 अलग-अलग संकेतकों के आधार पर दुनिया भर के देशों का मूल्यांकन किया जाता है।
इस रिपोर्ट के चौंकाने वाले आंकड़े बताते हैं कि प्रगति के तमाम दावों के बावजूद, भारत में लगभग 229 मिलियन (22.9 करोड़) लोग बहुआयामी रूप से गरीब हैं। यह संख्या पूरी दुनिया में किसी भी एक देश में रहने वाले गरीबों की सबसे बड़ी तादाद है। इसका मतलब यह है कि आबादी का एक बहुत बड़ा हिस्सा आज भी बुनियादी पोषण, साफ पानी, बिजली, स्कूली शिक्षा और बेहतर आवास जैसी जरूरी सुविधाओं से महरुम है।
हालांकि, सिक्के का दूसरा पहलू यह भी है कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। देश में जहां एक तरफ तकनीकी विकास, डिजिटल क्रांति और अरबपतियों की संख्या बढ़ रही है, वहीं दूसरी तरफ बुनियादी सुविधाओं की यह कमी एक गहरी खाई को दर्शाती है।
संक्षेप में कहें तो, भारत को पूरी तरह से एक 'गरीब देश' कहना गलत होगा, क्योंकि यहां असीमित आर्थिक क्षमताएं और संसाधन मौजूद हैं। लेकिन अत्यधिक असमान वितरण और करोड़ों लोगों का बुनियादी अधिकारों से वंचित होना यह साफ करता है कि देश के सामने आर्थिक विकास को हर नागरिक तक पहुंचाने की एक बहुत बड़ी चुनौती आज भी खड़ी है।
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