5 अप्रैल 1930: नमक कानून तोड़कर इतिहास रच दिया था गांधी ने
5 अप्रैल 1930 का दिन भारत के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में दर्ज है। इसी दिन महात्मा गांधी ने अपने साथियों के साथ मिलकर दांडी तट पर पहुंचकर अंग्रेजों के नमक कानून को चुनौती दी। यह कोई साधारण घटना नहीं थी, बल्कि यह भारत की आजादी की लड़ाई में एक मील का पत्थर था।
गांधी ने 12 मार्च, 1930 को साबरमती आश्रम से अपने 78 साथियों के साथ इस ऐतिहासिक यात्रा की शुरुआत की थी। लगभग 24 दिन और 385 किलोमीटर की पैदल यात्रा के बाद 5 अप्रैल को वे दांडी पहुंचे। वहां उन्होंने समुद्र तट पर नमक का एक टुकड़ा उठाकर ब्रिटिश कानून को तोड़ दिया। यह कार्यवाही कोई सामान्य विरोध नहीं थी, बल्कि यह अहिंसा के माध्यम से अत्याचार के खिलाफ जनता की आवाज थी।
नमक सत्याग्रह ने पूरे देश में लहर दौड़ा दी। हजारों लोगों ने नमक बनाना शुरू कर दिया और अंग्रेज सरकार के खिलाफ आंदोलन तेज हो गया। यह घटन
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