गांधी जी का अनशन और पाकिस्तान को 55 करोड़ रुपये दिए जाने का सच
भारत और पाकिस्तान के विभाजन के समय दोनों देशों के बीच संपत्ति का बंटवारा भी एक बेहद संवेदनशील मुद्दा था। विभाजन समझौते के तहत, भारत को पाकिस्तान को कुल 75 करोड़ रुपये देने थे। इसमें से 20 करोड़ रुपये की पहली किस्त तुरंत दे दी गई थी, लेकिन बाकी के 55 करोड़ रुपये को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव पैदा हो गया।
इसी बीच कश्मीर में दोनों देशों के बीच युद्ध छिड़ गया। भारत सरकार का मानना था कि अगर इस समय पाकिस्तान को 55 करोड़ रुपये दिए गए, तो वह इस धन का इस्तेमाल भारत के खिलाफ युद्ध में करेगा। इसलिए भारत ने इस राशि को रोकने का फैसला किया। हालांकि, महात्मा गांधी इस निर्णय से असहमत थे। उनका मानना था कि भारत को अपने अंतरराष्ट्रीय वादे से पीछे नहीं हटना चाहिए, चाहे परिस्थितियां कुछ भी हों।
गांधी जी ने दिल्ली में भड़की सांप्रदायिक हिंसा को रोकने और पाकिस्तान को उसका हक दिलाने के लिए आमरण अनशन शुरू कर दिया। उनके इस कड़े रुख के सामने झुकते हुए, सरकार ने 15 जनवरी को यह घोषणा कर दी कि वह पाकिस्तान को तत्काल 55 करोड़ रुपये जारी करेगी।
गांधी जी के इस फैसले और भूख हड़ताल ने देश के एक बड़े वर्ग को नाराज कर दिया। विशेष रूप से उग्रपंथी हिंदू संगठन और उनके समर्थक इस बात से बेहद आक्रोशित थे कि गांधी जी पाकिस्तान की मदद कर रहे हैं। यही वह तात्कालिक और मुख्य कारण बना जिसने महात्मा गांधी के प्रति नफरत को बढ़ाया और अंततः उनकी हत्या की साजिश को अंजाम दिया गया।
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