जीडीपी को कैसे समझें?
जीडीपी यानी सकल घरेलू उत्पाद—एक देश की आर्थिक सेहत का सबसे अहम संकेतक है। आप इसे किसी देश की "आर्थिक धड़कन" की तरह समझ सकते हैं। यह एक निश्चित समय, मसलन एक तिमाही या एक वर्ष के भीतर, देश की सीमाओं के अंदर उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं के कुल मौद्रिक मूल्य को मापता है।
यहाँ "अंतिम वस्तुएँ और सेवाएँ" शब्द पर ध्यान देना ज़रूरी है। यानी वे चीज़ें जो अंतिम उपभोक्ता द्वारा खरीदी जाती हैं, न कि बीच के चरणों में इस्तेमाल होने वाली कच्ची सामग्री। उदाहरण के लिए, अगर कोई कंपनी बिस्कुट बनाती है, तो जीडीपी में केवल बिस्कुट का अंतिम मूल्य जुड़ेगा, आटा या घी जैसे घटकों का नहीं। इससे डबल काउंटिंग नहीं होती।
जीडीपी के बढ़ने का मतलब है कि देश की अर्थव्यवस्था बढ़ रही है। लेकिन कमज़ोर जीडीपी या गिरावट आर्थिक मंदी की ओर इशारा कर सकती है। यह न सिर्फ नीति निर्माताओं बल्कि आम लोगों के लिए भी अहम है क्यो
टिप्पणियाँ
अभी तक कोई टिप्पणी नहीं। सबसे पहले प्रतिक्रिया दें।