शून्य का इतिहास: भारत से लेकर कंबोडिया तक

शून्य की अवधारणा गणित के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ थी। लंबे समय से भारतीय विद्वानों का मानना रहा है कि शून्य की खोज भारत में हुई। प्राचीन भारतीय गणितज्ञों ने 'शून्य' को न सिर्फ एक संख्या के रूप में स्वीकार किया, बल्कि उसे दार्शनिक और गणितीय संदर्भ में भी समझा।

हालांकि, 16 मई 2015 को एक दिलचस्प दावा सामने आया। अमेरिकी गणितज्ञ आमिर एक्जेल ने दावा किया कि दुनिया का सबसे पुराना शून्य न तो भारत में और न ही पश्चिम में, बल्कि कंबोडिया में मिला है। यह शिलालेख 7वीं शताब्दी का है और इसे 'कोपर शिलालेख' के रूप में जाना जाता है।

इस खोज ने गणित के इतिहास में एक नया बहस शुरू कर दिया। हालांकि, भारत की भूमिका अनसुलझी नहीं है। भारतीय गणितज्ञ आर्यभट्ट और ब्रह्मगुप्त ने शून्य को गणितीय नियमों के साथ परिभाषित किया, जो दुनिया के अन्य सभ्यताओं से अलग था।

इस तरह, शायद शून्य का पहला उल्लेख कं

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