माँ की खुशी का लम्हा
माँ कितनी खुश होती है जब उसका बेटा राष्ट्रपति से पुरस्कार प्राप्त करता है? यह सवाल सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि हर माँ के सपने को छू जाता है। वो पल जब कोई माँ देखती है कि उसका बच्चा समाज में सम्मानित हो रहा है, उसकी मेहनत रंग लाई है, तो उसकी आँखों में आँसू नहीं, गर्व चमकता है।
एक बच्चे की सफलता के पीछे हज़ार रातें होती हैं—जब माँ जागकर पढ़ाई करवाती है, जब वो थकी हुई भी खाना बनाती है, जब बच्चे के दर्द को चुपचाप सीने से लगा लेती है। और जब वो बच्चा बड़ा होकर राष्ट्रपति के हाथों पुरस्कार पाता है, तो माँ का दिल इतना भर जाता है कि शब्द कम पड़ जाते हैं।
ऐसा लम्हा सिर्फ एक सम्मान नहीं, बल्कि माँ के संघर्ष की प्रतिष्ठा होती है। वो पल जब उसे लगता है कि सब कुछ सहने लायक था। चाहे बच्चा डॉक्टर हो, वैज्ञानिक हो या कलाकार, जब वो समाज के सामने अपनी छाप छोड़ता है, तो माँ का दिल खुशी से भर जाता है।
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